परिचय
नमस्ते! मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से। आज के इस तेज़-रफ्तार दौर में जहाँ हर दूसरा व्यक्ति तनाव, प्रदूषण और गलत खानपान से जूझ रहा है, वहाँ स्वास्थ्य एक अनमोल खजाना बन गया है। हम अक्सर छोटी-मोटी परेशानियों के लिए तुरंत राहत देने वाली केमिकल दवाओं की ओर भागते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि ये दवाएं हमारे शरीर पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव डालती हैं? यहीं पर आयुर्वेद और योग जैसे हमारे प्राचीन ज्ञान की ज़रूरत महसूस होती है।
मैं मूल रूप से उत्तराखंड के शांत पहाड़ों से हूँ, जहाँ प्रकृति के साथ जीना जीवन का एक सहज हिस्सा है। वहाँ सुबह की ताज़ी हवा, शुद्ध पानी, खेतों में उगी सब्ज़ियाँ और प्रकृति के गोद में बसा एक शांत जीवन। इसके ठीक विपरीत, आज की शहरी ज़िंदगी में हम सुबह से शाम तक कंप्यूटर स्क्रीन के आगे बैठे रहते हैं, पैक फूड खाते हैं, और प्रकृति से हमारा जुड़ाव न के बराबर रह गया है। इस अंतर को मैंने अपनी आँखों से देखा है और महसूस किया है।
आप सोच रहे होंगे