परिचय
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ हर कोई जल्दी में है और हर समस्या का तुरंत समाधान चाहता है, हम अक्सर अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। ये जड़ें हैं हमारी प्रकृति से जुड़ाव, हमारी प्राचीन परंपराएं और एक संतुलित जीवनशैली। मैं पंकज, उत्तराखंड की देवभूमि से आता हूँ। मेरा बचपन पहाड़ों की शांत वादियों में बीता है, जहाँ दादी-नानी के नुस्खे और प्राकृतिक उपचार ही हर छोटी-मोटी तकलीफ का इलाज हुआ करते थे। हमने हमेशा खुद को प्रकृति का हिस्सा माना है। सुबह की ताज़ी हवा, शुद्ध पानी, खेतों में उगी सब्जियां और जीवन का एक धीमा, लयबद्ध प्रवाह – यह हमारे जीवन का आधार था। इसके विपरीत, आज की तेज़-रफ्तार शहरी ज़िंदगी में, हर चीज़ पैकेज्ड मिलती है, प्रदूषण चरम पर है और मानसिक तनाव एक आम बात है। लोग प्राकृतिक चीज़ों से दूर होकर सिर्फ केमिकल दवाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं, अक्सर उनके दीर्घकालिक प्रभावों को समझे बिना।
मैंने अपनी पढ़ाई कंप्यूटर साइंस में की है। एक तरफ जहाँ मैं डिजिटल दुनिया की जटिलताओं को सुलझा