परिचय
नमस्ते दोस्तों, मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से आपका अपना साथी। आज के इस तेज़-रफ्तार और भागदौड़ भरे जीवन में जहां हम हर रोज़ नई चुनौतियों का सामना करते हैं, वहां हमारे शरीर और मन को संतुलन में रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। हममें से ज़्यादातर लोग सुबह उठते ही अपने लैपटॉप, मोबाइल और मीटिंग्स की दुनिया में खो जाते हैं, और शाम होते-होते थकान और तनाव से चूर हो जाते हैं। इस शहरी जीवनशैली का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है, और जाने-अनजाने हम केमिकल दवाओं पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर होते चले जाते हैं। मेरा यह ब्लॉग इसी सोच को बदलने और आपको आयुर्वेद, योग और प्रकृति के करीब लाने की एक छोटी सी कोशिश है।
मैं मूल रूप से उत्तराखंड के शांत पहाड़ों से आता हूं, जहां हवा में शुद्धता और जीवनशैली में सादगी घुली हुई है। बचपन से मैंने पहाड़ों की उस जीवनशैली को देखा है जहां लोग प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। सुबह की ताज़ी हवा, घर का बना पौष्टिक भोजन, और जड़ी-बूटियों से मिलने वाले प्राकृतिक उपचार – यह सब हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग था। इसके ठीक उलट, मैंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है, और टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा एक लंबा अनुभव रहा है। आप सोच रहे होंगे कि एक कंप्यूटर साइंस का छात्र आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचारों में इतनी गहरी रुचि कैसे ले सकता है?
सच कहूं तो, मेरे टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड ने मुझे हर जानकारी को तर्क और विश्लेषण की कसौटी पर परखना सिखाया है। जब मैंने देखा कि कैसे हमारे आसपास लोग छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी तुरंत दवाइयों का सहारा ले रहे हैं, और कैसे इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स उनके जीवन को और जटिल बना रहे हैं, तो मुझे अपनी जड़ों की याद आई। मैंने सोचा कि क्यों न इस आधुनिक सोच और अपनी पारंपरिक ज्ञान को एक साथ लाया जाए? आयुर्वेद को अक्सर कुछ लोग सिर्फ ‘पुराना ज्ञान’ या ‘अंधविश्वास’ मान लेते हैं, लेकिन मेरे लिए यह जीवन जीने की एक वैज्ञानिक और तार्किक प्रणाली है। मैंने अपनी इस समझ और उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत से मिली प्रेरणा को साझा करने के लिए ही यह मंच बनाया है। मेरा उद्देश्य है कि मैं आपको सरल, साफ और भरोसेमंद जानकारी दूं, ताकि आप भी बिना किसी अतिशयोक्ति या झूठे दावे के, आयुर्वेद और योग के महत्व को समझ सकें और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बना सकें। यह यात्रा सिर्फ बीमारियों से लड़ने की नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन जीने की है।
अश्वगंधा क्या है और आयुर्वेद में इसका स्थान
आज हम बात करेंगे एक ऐसी दिव्य जड़ी-बूटी की जिसे आयुर्वेद में ‘रसायन’ की उपाधि दी गई है – अश्वगंधा। आपने शायद इसका नाम सुना होगा, या हो सकता है कि आप इसका इस्तेमाल भी करते हों। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह क्या है और क्यों इसे इतना ख़ास माना जाता है? सरल भाषा में कहें तो अश्वगंधा एक छोटा, झाड़ीदार पौधा होता है, जिसके पत्ते मखमली और फल लाल रंग के होते हैं। इसका वानस्पतिक नाम ‘विथानिया सोम्निफेरा’ (Withania somnifera) है, लेकिन आमतौर पर इसे भारतीय जिनसेंग या विंटर चेरी के नाम से भी जाना जाता है। ‘अश्वगंधा’ नाम भी अपने आप में बहुत कुछ कहता है – ‘अश्व’ का अर्थ है घोड़ा और ‘गंधा’ का अर्थ है गंध। इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि इसकी जड़ों में घोड़े जैसी ताक़त और सहनशक्ति देने वाले गुण होते हैं, और इसकी ताज़ी जड़ों से घोड़े के जैसी ही हल्की गंध भी आती है।
आयुर्वेद में अश्वगंधा का स्थान बहुत ऊंचा है। यह सदियों से भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। इसे मुख्य रूप से ‘रसायन’ वर्ग में रखा गया है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को फिर से जीवंत करने वाला, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने वाला और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाला होता है। आयुर्वेद के अनुसार, अश्वगंधा विशेष रूप से वात और कफ दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, मानसिक शांति प्रदान करता है और शरीर को तनाव और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।
अश्वगंधा को एक ‘एडेप्टोजेन’ के रूप में भी जाना जाता है। अब आप सोचेंगे कि यह एडेप्टोजेन क्या है? इसका मतलब है कि यह एक ऐसा पदार्थ है जो शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव के अनुकूल बनाने में मदद करता है। आज के समय में जब हम लगातार तनाव, चिंता और थकान से जूझ रहे हैं, अश्वगंधा जैसे एडेप्टोजेनिक गुण वाली जड़ी-बूटियां हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। यह आपके शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के संतुलित स्थिति में लाने में सहायता करता है। यह किसी जादू की छड़ी नहीं है जो तुरंत सब ठीक कर दे, बल्कि यह शरीर की अंदरूनी शक्ति को जगाकर उसे स्वयं ठीक होने की क्षमता देता है।
अश्वगंधा में मौजूद मुख्य जड़ी-बूटियाँ और उनके गुण
दोस्तों, अश्वगंधा अपने आप में एक पूरा पौधा है, और जब हम ‘अश्वगंधा’ उत्पाद की बात करते हैं तो आमतौर पर हम इस पौधे की जड़ के पाउडर या उसके सत्व की बात कर रहे होते हैं। तो इसमें कोई ‘अन्य जड़ी-बूटियां’ नहीं होतीं, बल्कि अश्वगंधा के पौधे के अंदर ही ऐसे शक्तिशाली यौगिक होते हैं जो इसे इतना प्रभावी बनाते हैं। इसकी जड़ें ही सबसे महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि उनमें औषधीय गुणों से भरपूर सक्रिय घटक पाए जाते हैं।
अश्वगंधा के मुख्य सक्रिय घटक ‘विथानोलाइड्स’ (Withanolides) कहलाते हैं। ये विथानोलाइड्स वास्तव में स्टेरॉयडल लैक्टोन्स का एक समूह हैं, जिनके कारण अश्वगंधा में इसके कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसके अलावा, इसमें एल्कलॉइड्स, सैपोनिन और फ्लेवोनोइड्स जैसे अन्य बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं जो इसके समग्र प्रभाव में योगदान करते हैं।
चलिए, इन गुणों को थोड़ा और समझते हैं:
1. एडेप्टोजेनिक गुण: जैसा कि मैंने पहले बताया, अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडेप्टोजेन है। इसका मतलब है कि यह शरीर को विभिन्न प्रकार के शारीरिक और मानसिक तनाव के प्रति अनुकूल बनाने में मदद करता है। यह शरीर में तनाव हार्मोन, जैसे कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करके काम करता है, जिससे तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिलती है। यह आपके शरीर को बाहरी दबावों से लड़ने के लिए तैयार करता है, जिससे आप ज़्यादा शांत और केंद्रित महसूस करते हैं।
2. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण: अश्वगंधा में मौजूद विथानोलाइड्स में सूजन-रोधी (anti-inflammatory) गुण होते हैं। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकता है, जो कई पुरानी बीमारियों का मूल कारण होती है। यह मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करने में भी सहायक हो सकता है।
3. एंटीऑक्सीडेंट गुण: अश्वगंधा में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट वे पदार्थ होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उम्र बढ़ने और कई बीमारियों का कारण बनते हैं। अश्वगंधा इन फ्री रेडिकल्स को बेअसर करके कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
4. न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण: कुछ अध्ययनों और पारंपरिक उपयोगों से पता चलता है कि अश्वगंधा मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और संज्ञानात्मक कार्यों जैसे याददाश्त और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
5. इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण: अश्वगंधा प्रतिरक्षा प्रणाली को मॉड्यूलेट करने में मदद करता है, यानी यह उसे संतुलित करता है। यह न केवल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ावा देता है बल्कि अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को शांत करने में भी मदद कर सकता है, जो ऑटोइम्यून स्थितियों में उपयोगी हो सकता है।
संक्षेप में, अश्वगंधा कोई ‘मिक्सचर’ नहीं है जिसमें कई जड़ी-बूटियां हों, बल्कि यह एक एकल जड़ी-बूटी है जिसके अपने भीतर ही गुणों का खजाना छिपा है। इसकी जड़ों में मौजूद सक्रिय घटक ही इसके अद्भुत प्रभावों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
अश्वगंधा के संभावित फायदे
अब जब हम अश्वगंधा को थोड़ा बेहतर समझ गए हैं, तो आइए बात करते हैं इसके उन संभावित फायदों के बारे में, जिनके लिए यह इतना लोकप्रिय है। मैं फिर दोहराना चाहूंगा कि आयुर्वेद में कोई भी जड़ी-बूटी या उत्पाद ‘चमत्कारी’ नहीं होता। यह धीरे-धीरे और प्राकृतिक तरीके से शरीर को सहायता प्रदान करता है। इसके लाभ पारंपरिक अनुभवों और सामान्य जानकारी पर आधारित हैं, और इनका अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है।
1. तनाव और चिंता कम करने में मदद: यह अश्वगंधा का शायद सबसे प्रसिद्ध लाभ है। आज के दौर में तनाव एक आम समस्या है। अश्वगंधा एक एडेप्टोजेन के रूप में काम करता है, जो शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। यह न केवल मानसिक तनाव को कम करता है, बल्कि शारीरिक तनाव जैसे नींद की कमी या शारीरिक श्रम से होने वाली थकान से निपटने में भी सहायक हो सकता है। यह आपको शांत और आरामदायक महसूस कराता है, जिससे चिंता के स्तर में कमी आ सकती है।
2. ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाना: अश्वगंधा को पारंपरिक रूप से ‘बल्य’ (बल देने वाला) और ‘वृष्य’ (ताकत बढ़ाने वाला) माना जाता है। यह शारीरिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और थकान को कम करने में मदद कर सकता है। खिलाड़ियों और उन लोगों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अधिक शारीरिक सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। यह मांसपेशियों की शक्ति और रिकवरी में भी सहायता कर सकता है।
3. नींद की गुणवत्ता में सुधार: कई लोग नींद न आने की समस्या से जूझते हैं। अश्वगंधा सीधे तौर पर एक नींद की दवा नहीं है, लेकिन तनाव और चिंता को कम करके यह आपको बेहतर और गहरी नींद लेने में मदद कर सकता है। यह शरीर को आराम देने और मन को शांत करने में सहायक होता है, जिससे नींद आने की प्रक्रिया स्वाभाविक और सुखद बन जाती है।
4. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना: एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारियों से लड़ने के लिए बहुत ज़रूरी है। अश्वगंधा प्रतिरक्षा प्रणाली को मॉड्यूलेट करता है, जिसका अर्थ है कि यह इसे आवश्यकतानुसार सक्रिय या शांत कर सकता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रमणों से बचाव में मदद मिल सकती है।
5. संज्ञानात्मक कार्यों में सहायता: पारंपरिक रूप से अश्वगंधा को मस्तिष्क के स्वास्थ्य और याददाश्त के लिए भी अच्छा माना जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है और एकाग्रता व याददाश्त में सुधार कर सकता है। यह मानसिक स्पष्टता और फोकस बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
6. पुरुषों और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार: आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। पुरुषों में यह शुक्राणु की गुणवत्ता और टेस्टोस्टेरोन के स्तर में सुधार कर सकता है, जबकि महिलाओं में यह हार्मोनल संतुलन और प्रजनन क्षमता को समर्थन दे सकता है।
इन सभी संभावित फायदों के बावजूद, यह समझना महत्वपूर्ण है कि अश्वगंधा कोई जादुई गोली नहीं है। इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखते हैं और ये आपकी जीवनशैली, आहार, शारीरिक प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं। इसे एक स्वस्थ जीवनशैली के पूरक के रूप में देखें, न कि किसी बीमारी के तत्काल इलाज के रूप में।
अश्वगंधा का उपयोग कैसे करें
अश्वगंधा के फायदों को जानने के बाद, अगला सवाल आता है कि इसका सही तरीके से उपयोग कैसे करें। आयुर्वेद में किसी भी जड़ी-बूटी का सही सेवन बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि मात्रा और सेवन का तरीका ही उसके प्रभाव को निर्धारित करता है। मैं यहां कुछ सामान्य दिशा-निर्देश दे रहा हूं, लेकिन याद रखें कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए आपके लिए सबसे अच्छी विधि और मात्रा आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर ही आधारित होनी चाहिए।
अश्वगंधा आमतौर पर कई रूपों में उपलब्ध होता है:
1. अश्वगंधा चूर्ण (पाउडर): यह अश्वगंधा का सबसे पारंपरिक और आसानी से उपलब्ध रूप है।
- मात्रा: आमतौर पर 3 से 6 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) पाउडर प्रतिदिन लेने की सलाह दी जाती है। आप इसे एक या दो बार में ले सकते हैं।
- सेवन का समय: इसे दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन कई लोग इसे शाम को या सोने से पहले लेना पसंद करते हैं, क्योंकि यह नींद को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। कुछ लोग इसे सुबह ऊर्जा और फोकस के लिए भी लेते हैं।
- किसके साथ लेना बेहतर: अश्वगंधा पाउडर को गर्म दूध के साथ लेना सबसे प्रभावी माना जाता है। दूध इसके गुणों को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है और इसके थोड़े कड़वे स्वाद को भी संतुलित करता है। आप इसे पानी या शहद के साथ भी ले सकते हैं।
2. अश्वगंधा कैप्सूल या टैबलेट: जो लोग पाउडर का स्वाद पसंद नहीं करते, उनके लिए कैप्सूल या टैबलेट एक सुविधाजनक विकल्प हैं।
- मात्रा: आमतौर पर, उत्पाद के लेबल पर दी गई खुराक का पालन करें। यह आमतौर पर 250mg से 500mg प्रति कैप्सूल होता है, और दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। इसमें अक्सर अश्वगंधा का मानकीकृत सत्व (standardized extract) होता है, जिसमें विथानोलाइड्स की एक निश्चित मात्रा होती है।
- सेवन का समय: भोजन के बाद या जैसा उत्पाद पर निर्देशित हो।
- किसके साथ लेना बेहतर: पानी के साथ।
3. अश्वगंधा घृत या लेह्य (घी-आधारित या जाम जैसी तैयारी): ये ज़्यादा पारंपरिक और स्वादिष्ट रूप हो सकते हैं, जिनमें अक्सर अन्य जड़ी-बूटियां भी शामिल होती हैं।
- मात्रा और सेवन: इनकी मात्रा और सेवन का तरीका उत्पाद के अनुसार भिन्न होता है, इसलिए लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
कुछ अतिरिक्त सुझाव:
- धीरे-धीरे शुरुआत करें: अगर आप पहली बार अश्वगंधा का उपयोग कर रहे हैं, तो हमेशा कम मात्रा से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि आपका शरीर अनुकूल हो सके।
- निरंतरता ज़रूरी: अश्वगंधा के लाभ देखने के लिए इसे नियमित रूप से कुछ हफ्तों या महीनों तक लेना पड़ सकता है। यह कोई तुरंत असर करने वाली दवा नहीं है।
- शारीरिक प्रकृति के अनुसार: आयुर्वेद में ‘प्रकृति’ (शरीर का गठन) बहुत महत्वपूर्ण है। वात प्रकृति के लोग इसे दूध और घी के साथ ज़्यादा अच्छे से पचाते हैं, जबकि पित्त प्रकृति के लोग इसे ठंडे दूध या पानी के साथ ले सकते हैं।
- पानी का सेवन: अश्वगंधा लेते समय पर्याप्त पानी पीना भी ज़रूरी है।
याद रखें, ये सिर्फ सामान्य सुझाव हैं। आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों और स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक आपको सबसे सटीक सलाह दे सकता है।
सावधानियां और ध्यान रखने योग्य बातें
दोस्तों, भले ही अश्वगंधा एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है और आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बिना किसी सावधानी के इस्तेमाल किया जा सकता है। हर आयुर्वेदिक उत्पाद की तरह, अश्वगंधा का उपयोग करते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि आपको कोई परेशानी न हो और आप इसके ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठा सकें।
1. गर्भावस्था और स्तनपान: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को अश्वगंधा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए जब तक कि उनके डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक इसकी स्पष्ट रूप से सलाह न दें। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है, जिससे गर्भावस्था में जोखिम हो सकता है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस अवधि में इससे बचना ही बेहतर है।
2. एलर्जी और संवेदनशीलता: कुछ लोगों को अश्वगंधा से एलर्जी हो सकती है। अगर आपको अश्वगंधा या सोलानेसी (Solanaceae) परिवार के पौधों (जैसे टमाटर, आलू, बैंगन, शिमला मिर्च) से एलर्जी है, तो आपको इसके सेवन से बचना चाहिए। एलर्जी के लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, खुजली या सांस लेने में तकलीफ शामिल हो सकती है। यदि आपको कोई असामान्य प्रतिक्रिया महसूस होती है तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें।
3. अन्य दवाओं के साथ उपयोग (ड्रग इंटरैक्शन): यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है। अश्वगंधा कुछ दवाओं के साथ परस्पर क्रिया (interact) कर सकता है, जिससे उनके प्रभाव बढ़ या घट सकते हैं या अवांछित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
- शामक (Sedatives): अश्वगंधा में शामक गुण हो सकते हैं। अगर आप पहले से ही नींद की गोलियां या एंटी-एंजाइटी दवाएं ले रहे हैं, तो अश्वगंधा के साथ सेवन करने से अत्यधिक उनींदापन या सुस्ती हो सकती है।
- इम्यूनोसप्रेसेंट (Immunosuppressants): चूंकि अश्वगंधा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे सकता है, यह उन दवाओं के प्रभाव को कम कर सकता है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने के लिए दी जाती हैं (जैसे कि अंग प्रत्यारोपण के बाद)।
- थायराइड की दवाएं: अश्वगंधा थायराइड हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको थायराइड की समस्या है और आप थायराइड हार्मोन की दवाएं ले रहे हैं, तो अश्वगंधा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। यह थायराइड हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है।
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाएं: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि अश्वगंधा ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को भी कम कर सकता है। अगर आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप की दवाएं ले रहे हैं, तो अश्वगंधा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें ताकि इन स्तरों की निगरानी की जा सके और दवा की खुराक को समायोजित किया जा सके।
4. ऑटोइम्यून बीमारियां: यदि आपको ल्यूपस, मल्टीपल स्केलेरोसिस, या रूमेटाइड आर्थराइट