Konch के फायदे, उपयोग और सावधानियां | आयुर्वेद

परिचय

नमस्ते दोस्तों! मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से। आज आपसे ऐसी बात करनी है जो मेरे दिल के बहुत करीब है और जिसके लिए मैंने यह ब्लॉग शुरू किया है। हम सब एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ ज़िंदगी की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि खुद के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है। सुबह से शाम तक भागदौड़, ऑफिस का तनाव, घर की जिम्मेदारियां और इन सबके बीच सेहत को नजरअंदाज करना हमारी आदत बन गई है। जब तक शरीर में कोई बड़ी दिक्कत न हो, हम अक्सर अपनी सेहत को हल्के में लेते हैं। और जब दिक्कत होती है, तो सबसे पहले भागते हैं केमिकल वाली दवाओं की तरफ, जो अक्सर लक्षणों को दबाती हैं, जड़ से खत्म नहीं करतीं।

मैं खुद कंप्यूटर साइंस का छात्र रहा हूँ। मेरी शुरुआती पढ़ाई और सोच पूरी तरह से लॉजिक, डेटा और टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। मुझे हर चीज़ का वैज्ञानिक आधार चाहिए होता था, हर बात का ठोस प्रमाण। लेकिन उत्तराखंड की मिट्टी में पला-बढ़ा हूँ, जहाँ प्रकृति और पहाड़ों का सीधा असर हमारी जीवनशैली पर होता है। मैंने बचपन से देखा है कि मेरे दादा-दादी, नाना-नानी, हमारे गाँव के लोग छोटी-मोटी बीमारियों के लिए अक्सर घर के नुस्खों, जड़ी-बूटियों और योग का सहारा लेते थे। उनकी लंबी, निरोगी और खुशहाल ज़िंदगी ने मुझे सोचने पर मजबूर किया।

धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि यह सिर्फ पुरानी बातें या अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि यह एक गहरी समझ है प्रकृति के साथ जीने की। आयुर्वेद और योग सिर्फ उपचार के तरीके नहीं, बल्कि एक पूरी जीवनशैली है जो हमें प्रकृति से जोड़ती है। मेरी तकनीकी पृष्ठभूमि ने मुझे चीजों को तर्क की कसौटी पर कसना सिखाया है, और इसी नजरिए से जब मैंने आयुर्वेद को पढ़ना और समझना शुरू किया, तो मुझे इसकी गहराई और वैज्ञानिकता ने चौंका दिया। मुझे लगा कि यह ज्ञान, यह संतुलन, यह प्राकृतिक जीवनशैली सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे हर उस व्यक्ति तक पहुँचाना चाहिए जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को खो रहा है। मेरा यह ब्लॉग इसी कोशिश का एक छोटा सा हिस्सा है, जहाँ मैं अपनी समझ, तर्क और अनुभवों के आधार पर आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली की बातें आप तक पहुँचाता हूँ, ताकि आप केमिकल दवाओं पर पूरी तरह निर्भर न रहें और अपनी सेहत की बागडोर खुद संभाल सकें।

Konch क्या है और आयुर्वेद में इसका स्थान

आज हम बात करेंगे एक ऐसे अद्भुत आयुर्वेदिक उत्पाद, कोंच के बारे में, जिसे अक्सर कोंच बीज चूर्ण के नाम से भी जाना जाता है। कोंच, जिसे अंग्रेजी में म्यूकुना प्रुरिएन्स (Mucuna pruriens) कहते हैं, एक फलीदार पौधा है जो भारत, अफ्रीका और कैरिबियाई देशों में पाया जाता है। यह एक बेल की तरह उगता है और इसकी फलियों में चमकदार काले या भूरे रंग के बीज होते हैं, जिन्हें कोंच बीज कहते हैं।

आयुर्वेद में कोंच का इस्तेमाल हजारों सालों से होता आ रहा है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों, जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता, में कोंच बीज के गुणों और इसके उपयोग का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसे संस्कृत में ‘आत्मगुप्ता’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘जो स्वयं की रक्षा करता है’ या ‘गुप्त शक्ति’। यह नाम ही इसके औषधीय महत्व को दर्शाता है। आयुर्वेद में कोंच को एक ‘रसायन’ जड़ी-बूटी के रूप में देखा जाता है। रसायन वो होते हैं जो शरीर को फिर से जीवंत करते हैं, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं, और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

पारंपरिक रूप से, कोंच बीज को वात दोष को शांत करने वाला, बलवर्धक (शक्ति बढ़ाने वाला) और वृष्य (एफ्रोडाइजियाक) माना जाता है। इसे तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर इसके सकारात्मक प्रभावों के लिए भी जाना जाता है। यह अक्सर पाउडर (चूर्ण) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, या फिर इसे विभिन्न आयुर्वेदिक फॉर्मूलों में एक मुख्य घटक के रूप में शामिल किया जाता है। कोंच एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है जिसे सही ढंग से और सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। लेकिन जैसा कि आयुर्वेद में हर जड़ी-बूटी के साथ होता है, इसका उपयोग भी व्यक्तिगत प्रकृति (प्रकृति) और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

Konch में मौजूद मुख्य जड़ी-बूटियाँ और उनके गुण

जब हम “कोंच” की बात करते हैं, तो मुख्य रूप से हम कोंच बीज (Mucuna pruriens seeds) की ही बात करते हैं। यह अपने आप में एक पूर्ण जड़ी-बूटी है जिसके अनगिनत गुण हैं। हालांकि, कई बार आयुर्वेदिक उत्पादों में कोंच बीज को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि उसके गुणों को बढ़ाया जा सके या किसी खास समस्या के लिए उसे और प्रभावी बनाया जा सके।

कोंच बीज में कई सक्रिय यौगिक होते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है L-Dopa (लेवोडोपा)। L-Dopa एक प्राकृतिक अमीनो एसिड है जो हमारे शरीर में डोपामाइन (dopamine) में परिवर्तित होता है। डोपामाइन हमारे मस्तिष्क में एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड, प्रेरणा, सीखने और मोटर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि कोंच को तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

इसके अलावा, कोंच बीज में और भी कई लाभकारी तत्व पाए जाते हैं, जैसे:

अल्कलॉइड्स: ये विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं और कोंच के औषधीय गुणों में योगदान करते हैं।

फ्लैवोनोइड्स: ये शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं और सूजन को कम कर सकते हैं।

सपोनिन: ये यौगिक कई औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें इम्यून सिस्टम को मजबूत करना और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करना शामिल है।

टेनिन्स: इनमें कसैले गुण होते हैं और ये एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव दिखा सकते हैं।

प्रोटीन और फाइबर: ये शरीर के सामान्य कामकाज और पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, कोंच बीज में मधुर (मीठा) और तिक्त (कड़वा) रस होता है। इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए यह वात दोष को संतुलित करने में विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। यह बलवर्धक, वृष्य, रसायन और शुक्रल (शुक्रधातु बढ़ाने वाला) गुणों से भरपूर होता है। मेरे पहाड़ों में, जहां लोग सदियों से प्रकृति के करीब रहते आए हैं, ऐसी जड़ी-बूटियों के गुणों को पीढ़ी दर पीढ़ी अनुभव के आधार पर समझा गया है। कोंच भी उन्हीं में से एक है, जिसे शरीर की ऊर्जा और vitality को बढ़ाने के लिए एक प्राकृतिक स्रोत के रूप में देखा जाता है। यह सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जो हमारे शरीर और मन के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

Konch के संभावित फायदे

कोंच बीज को आयुर्वेद में एक “रसायन” और “बलवर्धक” जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को rejuvenate करने और ताकत बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन यहाँ हमें किसी भी चमत्कारी या रातों-रात असर के दावे से बचना है। आयुर्वेद धीरे-धीरे काम करता है, शरीर के संतुलन को वापस लाता है। कोंच के जो संभावित फायदे पारंपरिक अनुभवों और सामान्य आयुर्वेदिक समझ के आधार पर बताए जाते हैं, वे इस प्रकार हैं:

1. पुरुष स्वास्थ्य के लिए: यह कोंच का सबसे प्रसिद्ध उपयोग है। आयुर्वेद में इसे वृष्य (एफ्रोडाइजियाक) माना जाता है। परंपरागत रूप से, इसका उपयोग पुरुषों में शक्ति, सहनशक्ति और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में सहायक माना जाता है। यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को संतुलित करने और शुक्राणुओं की गुणवत्ता व संख्या में सुधार करने में मदद कर सकता है। यह तनाव और चिंता के कारण होने वाली यौन समस्याओं को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

2. तंत्रिका तंत्र का समर्थन: कोंच में L-Dopa की उपस्थिति इसे तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद बनाती है। यह डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे मूड में सुधार, प्रेरणा में वृद्धि और पार्किंसन रोग जैसी स्थितियों में लक्षणों को प्रबंधित करने में सहायक हो सकता है (हालांकि, यह किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है और डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है)। यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

3. मूड और तनाव प्रबंधन: डोपामाइन का सीधा संबंध हमारे मूड और खुशी की भावनाओं से है। कोंच का सेवन डोपामाइन के स्तर को संतुलित करके तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। यह मन को शांत करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

4. मांसपेशियों के निर्माण और ताकत के लिए: एथलीटों और बॉडीबिल्डरों के बीच भी कोंच लोकप्रिय है। माना जाता है कि यह मांसपेशियों के निर्माण को बढ़ावा देने, ताकत और सहनशक्ति में सुधार करने में मदद करता है। यह शरीर की समग्र ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।

5. एंटी-ऑक्सीडेंट गुण: कोंच में मौजूद फ्लैवोनोइड्स जैसे यौगिक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये शरीर को हानिकारक मुक्त कणों से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं, जिससे कोशिकाओं को क्षति पहुंचने का खतरा कम होता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

6. सूजन को कम करने में सहायक: कुछ पारंपरिक उपयोगों और शुरुआती शोधों से पता चलता है कि कोंच में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण हो सकते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

7. पाचन स्वास्थ्य: कोंच में फाइबर भी होता है जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है।

यह समझना ज़रूरी है कि ये लाभ पारंपरिक ज्ञान और कुछ अध्ययनों पर आधारित हैं। आयुर्वेद में किसी भी जड़ी-बूटी का प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, उसकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली और खुराक पर निर्भर करता है। इसलिए, कोंच को किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के इलाज के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक सहायक के रूप में देखना चाहिए जो शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

Konch का उपयोग कैसे करें

कोंच बीज चूर्ण का उपयोग करने का तरीका व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और उद्देश्य पर निर्भर करता है। आयुर्वेद में हर जड़ी-बूटी की खुराक को व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से तय किया जाता है। इसलिए, हमेशा किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना सबसे अच्छा होता है। हालांकि, मैं आपको सामान्य जानकारी और पारंपरिक तरीकों के आधार पर कुछ बातें बता सकता हूँ।

सामान्य मात्रा:

कोंच बीज चूर्ण की सामान्य खुराक 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन होती है। इसे एक या दो बार में लिया जा सकता है। कुछ मामलों में, खुराक थोड़ी अधिक या कम हो सकती है, लेकिन यह विशेषज्ञ की सलाह पर ही निर्भर करता है। शुरू में हमेशा कम मात्रा से ही शुरू करना चाहिए ताकि शरीर की प्रतिक्रिया को समझा जा सके।

सेवन का समय:

कोंच को आमतौर पर सुबह या शाम को लिया जाता है।

सुबह: नाश्ते के बाद या भोजन के बाद।

शाम: रात के खाने के बाद या सोने से पहले।

यह याद रखना ज़रूरी है कि खाली पेट लेने से कुछ लोगों को पेट में हल्की असुविधा या मितली महसूस हो सकती है, इसलिए इसे भोजन के बाद लेना बेहतर माना जाता है।

किसके साथ लेना बेहतर रहता है:

आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों को अक्सर किसी ‘अनुपान’ (carrier) के साथ लिया जाता है, जिससे उनके गुण शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित हो सकें और उनका प्रभाव बढ़ सके। कोंच के लिए कुछ सामान्य अनुपान हैं:

दूध के साथ: यह सबसे लोकप्रिय तरीका है। कोंच चूर्ण को गर्म दूध (गाय का दूध अक्सर पसंद किया जाता है) में मिलाकर लिया जा सकता है। यह इसके पौष्टिक और बलवर्धक गुणों को बढ़ाता है।

शहद के साथ: थोड़ी मात्रा में कोंच चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटा जा सकता है। यह इसके स्वाद को बेहतर बनाता है और गुणों को भी।

गुनगुने पानी के साथ: अगर आप डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते हैं, तो कोंच चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ भी लिया जा सकता है।

घी के साथ: कुछ आयुर्वेदिक वैद्य कोंच को घी के साथ लेने की सलाह देते हैं, खासकर वात दोष वाले लोगों के लिए, क्योंकि घी वात को शांत करने में मदद करता है।

कुछ ज़रूरी बातें:

निरंतरता: आयुर्वेदिक उपचारों का असर धीरे-धीरे होता है। कोंच का पूरा लाभ पाने के लिए इसे नियमित रूप से कुछ हफ्तों या महीनों तक लेना पड़ सकता है।

व्यक्तिगत स्थिति: जैसा मैंने पहले कहा, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (प्रकृति) और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। जो खुराक और अनुपान एक व्यक्ति के लिए सही है, वह दूसरे के लिए नहीं हो सकता। इसलिए, स्व-चिकित्सा से बचें और किसी विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।

शुद्धता: हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले और शुद्ध कोंच चूर्ण का ही उपयोग करें। इसकी पहचान कैसे करें, इस पर हम आगे बात करेंगे।

एक कंप्यूटर साइंस के छात्र के रूप में, मैं हमेशा ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ पर जोर देता रहा हूँ। आयुर्वेद में भी यही बात लागू होती है – सही तरीके से, सही मात्रा में, और सही मार्गदर्शन में इस्तेमाल करना ही सबसे अच्छा ‘प्रैक्टिस’ है।

सावधानियां और ध्यान रखने योग्य बातें

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे पूरी तरह से हानिरहित होती हैं या उन्हें बिना सोचे-समझे इस्तेमाल किया जा सकता है। कोंच एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है और इसका उपयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों और बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। मेरी तकनीकी पृष्ठभूमि मुझे हमेशा हर चीज़ के संभावित जोखिमों और सीमाओं को समझने के लिए प्रेरित करती है, और आयुर्वेद में भी यह दृष्टिकोण उतना ही महत्वपूर्ण है।

1. गर्भावस्था और स्तनपान:

गर्भावस्था के दौरान और स्तनपान कराने वाली माताओं को कोंच का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कोंच के गर्भ पर संभावित प्रभावों के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है, और सुरक्षा को प्राथमिकता देना सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।

2. बच्चों के लिए:

बच्चों को कोंच देने से बचना चाहिए, जब तक कि किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा विशेष रूप से सलाह न दी जाए। बच्चों का शरीर वयस्कों से अलग होता है और उनकी खुराक व प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

3. एलर्जी और संवेदनशीलता:

कुछ लोगों को कोंच या इसके किसी भी घटक से एलर्जी हो सकती है। यदि आपको कोंच का सेवन करने के बाद त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सांस लेने में कठिनाई या कोई अन्य असामान्य प्रतिक्रिया महसूस होती है, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें और चिकित्सक से संपर्क करें।

4. अन्य दवाओं के साथ उपयोग (ड्रग इंटरैक्शन):

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है। कोंच में L-Dopa होता है, जो कुछ एलोपैथिक दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है। विशेष रूप से:

पार्किंसन रोग की दवाएं: यदि आप पार्किंसन रोग के लिए L-Dopa युक्त दवाएं ले रहे हैं, तो कोंच का सेवन बिल्कुल न करें क्योंकि यह L-Dopa की खुराक को अत्यधिक बढ़ा सकता है और गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

ब्लड प्रेशर की दवाएं: कोंच रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है। यदि आप उच्च या निम्न रक्तचाप के लिए दवाएं ले रहे हैं, तो कोंच का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

ब्लड शुगर की दवाएं: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि कोंच रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है। यदि आपको मधुमेह है और आप दवाएं ले रहे हैं, तो कोंच का सेवन करते समय अपने रक्त शर्करा के स्तर की नियमित निगरानी करें और डॉक्टर से सलाह लें।

एंटीडिप्रेसेंट (MAOIs): मोनोमाइन ऑक्सीडेज इनहिबिटर (MAOIs) नामक एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के साथ कोंच का उपयोग खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह रक्तचाप को अत्यधिक बढ़ा सकता है।

किसी भी एलोपैथिक या अन्य हर्बल सप्लीमेंट के साथ कोंच का सेवन करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट को सूचित करें।

5. स्वास्थ्य संबंधी विशेष स्थितियां:

यदि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जैसे हृदय रोग, यकृत रोग, गुर्दे की बीमारी, मानसिक विकार (सिज़ोफ्रेनिया), या अल्सर, तो कोंच का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक या एलोपैथिक डॉक्टर से परामर्श करना अनिवार्य है।

6. अति प्रयोग से बचें:

किसी भी चीज़ की अति हानिकारक होती है। कोंच की अधिक मात्रा लेने से अनिद्रा, बेचैनी, सिरदर्द, मतली, उल्टी और हृदय गति में वृद्धि जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हमेशा निर्धारित खुराक का ही पालन करें।

सारांश में, कोंच एक अद्भुत जड़ी-बूटी है, लेकिन इसका सम्मान के साथ और सावधानी से उपयोग किया जाना चाहिए। मेरे पहाड़ों में लोग कहते हैं, “जड़ी-बूटी संजीवनी है, पर वैद्य बिना विष।” मतलब ज

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