परिचय
नमस्ते दोस्तों, मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से। आज मैं आपके साथ एक ऐसी बात साझा करने आया हूँ जो मेरे दिल के बहुत करीब है – आयुर्वेद और योग। आप सोच रहे होंगे कि कंप्यूटर साइंस का छात्र रहा मैं, जिसने अपनी ज़िंदगी का अच्छा-खासा हिस्सा कोड और सर्वर के बीच बिताया, वो आज आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली की बात क्यों कर रहा है? दरअसल, यही तो जीवन का कमाल है। हमने अपनी शिक्षा भले ही आधुनिक विज्ञान में ली हो, लेकिन हमारी जड़ों में, हमारे पहाड़ों की हवाओं में, हमारी मिट्टी में प्रकृति का ज्ञान रचा-बसा है। आज की भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी में जहां हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए हम तुरंत केमिकल वाली दवाओं की तरफ भागते हैं, वहीं हमारे पूर्वज सदियों से प्रकृति की गोद में पले-बढ़े ज्ञान पर भरोसा करते आए हैं।
उत्तराखंड में जहां मैं पला-बढ़ा, वहां सुबह सूरज की पहली किरण के साथ योग और ध्यान जीवन का हिस्सा होता था। खेतों में काम करते बुजुर्गों के चेहरे पर एक ऐसी चमक और सेहत दिखती थी जो आज शहरों में महंगी-से-महंगी जिम या डाइट प्लान भी नहीं दे पाते। वहां हर घर में दादी-नानी के नुस्खों की एक पूरी लिस्ट होती थी, जिसमें तुलसी, हल्दी, अदरक और ना जाने कितनी ही जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता था। लेकिन जब मैं शहर आया, कंप्यूटर की दुनिया में खो गया, तो मैंने देखा कि कैसे लोग छोटे-छोटे सिर दर्द, जुकाम या पेट की तकलीफ के लिए भी फौरन दवाइयों का सहारा लेने लगे हैं, और अक्सर ये दवाइयां एक समस्या ठीक करती हैं तो दूसरी पैदा कर देती हैं।
मेरे खुद के अनुभव भी कुछ ऐसे ही रहे। घंटों स्क्रीन के सामने बैठने से होने वाले पीठ दर्द, आंखों की थकान और कभी-कभी पाचन संबंधी दिक्कतें। इन सब के लिए मैंने भी शुरुआत में आधुनिक दवाओं का ही सहारा लिया। लेकिन कुछ समय बाद मुझे महसूस हुआ कि ये सिर्फ लक्षणों को दबा रही हैं, जड़ से खत्म नहीं कर रही। यहीं पर मेरे अंदर की देवभूमि की पुकार जाग उठी। मैंने अपनी टेक्नोलॉजी वाली तार्किक सोच के साथ आयुर्वेद और योग को समझना शुरू किया। मैं हर जानकारी को सिर्फ इसलिए नहीं मानता था कि वो पुरानी है, बल्कि मैं उसे आज के विज्ञान और सामान्य अनुभवों की कसौटी पर परखता था। इसी यात्रा में मैंने महसूस किया कि आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है जो हमें प्रकृति से जोड़ती है। मेरा यह ब्लॉग इसी सोच का नतीजा है – मैं चाहता हूँ कि आप भी आयुर्वेद की इस अद्भुत दुनिया को समझें, और केमिकल दवाओं पर पूरी तरह निर्भर रहने की बजाय, एक संतुलित और प्राकृतिक जीवनशैली की ओर कदम बढ़ाएं। आज हम ऐसी ही एक बेहद खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, ‘पुनर्नवा’ के बारे में विस्तार से बात करेंगे।
Punarnava क्या है और आयुर्वेद में इसका स्थान
चलिए, अब बात करते हैं आज के हमारे मुख्य विषय, पुनर्नवा की। नाम से ही पता चलता है “पुनर्नवा” यानी “जो शरीर को फिर से नया कर दे”। यह एक बहुत ही खास और ताकतवर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे सदियों से हमारे आयुर्वेद के जानकारों ने इस्तेमाल किया है। इसका वानस्पतिक नाम बोएरहाविया डिफ्यूसा (Boerhavia diffusa) है, और आमतौर पर इसे ‘सांठ’ या ‘गदहपूरना’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बेल की तरह फैलने वाला पौधा होता है जो अक्सर बारिश के मौसम में खाली जगहों पर उगता है। इसकी जड़ें, तना और पत्तियां, तीनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं।
आयुर्वेद में पुनर्नवा को एक महत्वपूर्ण ‘रसायन’ जड़ी-बूटी माना गया है। रसायन का मतलब होता है ऐसी औषधि जो शरीर को नई ऊर्जा दे, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करे और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाए। आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय में पुनर्नवा का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसे विशेष रूप से शरीर में जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ (शोथ या एडिमा) को कम करने, गुर्दों को स्वस्थ रखने और लीवर के कार्यों को सुधारने में बहुत प्रभावी माना गया है।
पारंपरिक रूप से, पुनर्नवा का उपयोग शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने (डिटॉक्सिफाई) और आंतरिक अंगों, खासकर गुर्दों और लीवर को मजबूत करने के लिए किया जाता रहा है। इसकी तासीर थोड़ी ठंडी मानी जाती है और यह कड़वा, कसैला स्वाद लिए होता है। आयुर्वेद के सिद्धांत ‘त्रिदोष’ के अनुसार, यह मुख्य रूप से कफ और वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है। कहने का मतलब यह है कि यह सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि आयुर्वेद की एक ऐसी देन है जो हमारे शरीर को अंदर से साफ और मजबूत करने की क्षमता रखती है।
Punarnava में मौजूद मुख्य जड़ी-बूटियाँ और उनके गुण
जब हम ‘पुनर्नवा’ नाम के किसी आयुर्वेदिक उत्पाद की बात करते हैं, तो अक्सर इसका मतलब केवल एक अकेली जड़ी-बूटी बोएरहाविया डिफ्यूसा (Boerhavia diffusa) से नहीं होता, बल्कि यह कई बार एक संयोजन (फॉर्मूलेशन) भी हो सकता है जिसमें पुनर्नवा मुख्य घटक होता है और उसके साथ कुछ अन्य सहयोगी जड़ी-बूटियां भी मिलाई जाती हैं। हालांकि, पुनर्नवा खुद में एक बहुत शक्तिशाली जड़ी-बूटी है और इसके गुणों को समझना बहुत ज़रूरी है।
पुनर्नवा (बोएरहाविया डिफ्यूसा) के मुख्य गुण:
यह जड़ी-बूटी कई औषधीय यौगिकों जैसे एल्कलॉइड (punarnavine), फ्लेवोनोइड्स, स्टेरॉयड, ग्लाइकोसाइड्स और लिनोलिक एसिड से भरपूर होती है। इन्हीं तत्वों के कारण इसके कई गुण हैं:
- मूत्रवर्धक (Diuretic) गुण: यह शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे सूजन (एडिमा) कम हो सकती है। यह गुर्दों के सही कामकाज में सहायक होता है।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) गुण: इसमें सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो शरीर में कहीं भी होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- हेपेटोप्रोटेक्टिव (Hepatoprotective) गुण: यह लीवर की रक्षा करने और उसके स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह लीवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और उनके कार्य को सुधारने में मदद कर सकता है।
- एंटीऑक्सीडेंट गुण: यह शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है, जिससे कोशिकाओं का स्वास्थ्य बना रहता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
- डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification) में सहायक: यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे रक्त को शुद्ध करने में भी सहायता मिल सकती है।
कई आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में पुनर्नवा के साथ कुछ अन्य जड़ी-बूटियां भी शामिल की जाती हैं जो इसके प्रभाव को बढ़ाती हैं या विशिष्ट समस्याओं के लिए इसे और भी प्रभावी बनाती हैं। उदाहरण के लिए, पुनर्नवा मंडूर जैसे उत्पादों में पुनर्नवा के साथ मंडूर भस्म (लोहे का एक आयुर्वेदिक रूप), त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली), त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा) और अन्य जड़ी-बूटियां भी होती हैं। ये संयोजन विशिष्ट स्वास्थ्य लाभों को लक्षित करते हैं।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि पुनर्नवा का मुख्य काम शरीर के प्राकृतिक शोधन तंत्र (detoxification system) को सहारा देना और उसे मजबूत करना है। यह कोई जादुई गोली नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक सहयोगी है जो आपके शरीर को अपना काम बेहतर तरीके से करने में मदद करता है।
Punarnava के संभावित फायदे
जैसा कि मैंने पहले भी कहा, आयुर्वेद किसी भी चीज़ के लिए “चमत्कारी” या “एक रात में असर” जैसे दावे नहीं करता। पुनर्नवा के भी फायदे धीरे-धीरे और नियमित उपयोग से ही मिलते हैं। यह शरीर के संतुलन को बहाल करने में मदद करता है, न कि सिर्फ लक्षणों को दबाने में। पारंपरिक अनुभवों और सामान्य आयुर्वेदिक जानकारी के आधार पर पुनर्नवा के कुछ संभावित फायदे इस प्रकार हैं:
1. गुर्दे और मूत्र प्रणाली के स्वास्थ्य में सहायक: पुनर्नवा को पारंपरिक रूप से गुर्दों के लिए एक टॉनिक माना जाता है। इसके मूत्रवर्धक गुणों के कारण यह शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है। यह मूत्र मार्ग को साफ रखने और उसके स्वस्थ कामकाज को बनाए रखने में सहायक हो सकता है। कुछ लोगों को बार-बार मूत्र पथ के संक्रमण (UTI) की समस्या होती है, तो पुनर्नवा इसमें भी सहायक हो सकता है। यह पेशाब के बहाव को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
2. लीवर के कार्य को सुधारने में मददगार: पुनर्नवा में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं, जिसका अर्थ है कि यह लीवर की कोशिकाओं को हानिकारक पदार्थों से बचाने में मदद कर सकता है। यह लीवर के डिटॉक्सिफिकेशन कार्य को बढ़ावा देने और पित्त के उत्पादन को संतुलित करने में सहायक हो सकता है। स्वस्थ लीवर पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
3. शरीर की सूजन (एडिमा) को कम करने में सहायक: शरीर में कहीं भी पानी जमा होने (शोथ या एडिमा) की स्थिति में पुनर्नवा बहुत उपयोगी माना जाता है। इसके मूत्रवर्धक गुण शरीर से अतिरिक्त द्रव को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे सूजन कम हो सकती है। यह खास तौर पर पैरों, टखनों या शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली सूजन के लिए लाभकारी हो सकता है।
4. पाचन और भूख में सुधार: पुनर्नवा को पाचन अग्नि (मेटाबॉलिज्म) को मजबूत करने वाला माना जाता है। यह पाचन तंत्र को ठीक करने और भूख को बढ़ाने में मदद कर सकता है। स्वस्थ पाचन से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
5. हृदय स्वास्थ्य का समर्थन: हालांकि यह सीधे तौर पर हृदय रोग का इलाज नहीं है, लेकिन शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने की इसकी क्षमता हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से हृदय स्वास्थ्य को सहारा मिल सकता है।
6. जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत: इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण, पुनर्नवा को पारंपरिक रूप से जोड़ों के दर्द और सूजन, खासकर गठिया जैसी स्थितियों में राहत प्रदान करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह शरीर में वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है, जिसे आयुर्वेद में जोड़ों की समस्याओं का एक मुख्य कारण माना जाता है।
7. त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा: शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और रक्त को शुद्ध करने की इसकी क्षमता के कारण, यह त्वचा के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साफ रक्त और बेहतर डिटॉक्सिफिकेशन अक्सर साफ और स्वस्थ त्वचा से जुड़ा होता है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये सभी संभावित लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और अनुभव पर आधारित हैं। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, और किसी भी जड़ी-बूटी का असर अलग-अलग हो सकता है। इसे किसी गंभीर बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक सहायक के रूप में देखना चाहिए जो शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करता है।
Punarnava का उपयोग कैसे करें
किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का सही उपयोग जानना बहुत ज़रूरी है ताकि उसका पूरा फायदा मिल सके और किसी तरह की परेशानी न हो। पुनर्नवा भी इसका अपवाद नहीं है। इसका उपयोग कई रूपों में किया जाता है जैसे पाउडर (चूर्ण), काढ़ा (क्वाथ), कैप्सूल या फिर इसके जूस के रूप में।
सामान्य मात्रा और सेवन का समय:
- पुनर्नवा चूर्ण (पाउडर): आमतौर पर, 3-6 ग्राम चूर्ण को दिन में एक या दो बार हल्के गर्म पानी या दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है। इसे खाने के बाद लेना बेहतर होता है।
- पुनर्नवा कैप्सूल/टैबलेट: आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह पर, आमतौर पर 1-2 कैप्सूल या टैबलेट दिन में दो बार खाने के बाद पानी के साथ लिए जा सकते हैं।
- पुनर्नवा रस (जूस): कुछ ब्रांड पुनर्नवा का जूस भी देते हैं। इसकी सामान्य खुराक 10-20 मिलीलीटर होती है, जिसे बराबर मात्रा में पानी मिलाकर दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है।
- पुनर्नवा काढ़ा: अगर आप ताजी जड़ी-बूटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 10-20 ग्राम पुनर्नवा की जड़ या पत्तों को 400 मिलीलीटर पानी में तब तक उबालें जब तक वह एक चौथाई (लगभग 100 मिलीलीटर) न रह जाए। इसे छानकर दिन में एक या दो बार ले सकते हैं।
किसके साथ लेना बेहतर रहता है:
पुनर्नवा को आमतौर पर सादे पानी के साथ लेना सबसे आसान और प्रभावी होता है। अगर पाचन अग्नि बढ़ाने या वात दोष को संतुलित करने के लिए ले रहे हैं, तो इसे हल्के गर्म पानी के साथ लेना फायदेमंद हो सकता है। कुछ आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में इसे दूध या शहद के साथ लेने की भी सलाह दी जाती है, लेकिन यह उत्पाद के विशिष्ट संयोजन और आपके शरीर की प्रकृति पर निर्भर करता है।
एक महत्वपूर्ण बात जो हमेशा याद रखनी चाहिए:
हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (प्रकृति), उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी की गंभीरता अलग होती है। इसलिए, पुनर्नवा की सटीक खुराक और सेवन का तरीका किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बिना निर्धारित नहीं करना चाहिए। वे आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुसार आपको सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। मैं बार-बार इस बात पर ज़ोर देता हूँ क्योंकि आयुर्वेद एक व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति है, और “वन साइज़ फिट्स ऑल” का सिद्धांत यहां काम नहीं करता। बिना सलाह के अंधाधुंध उपयोग फायदे की बजाय नुकसान भी कर सकता है।
सावधानियां और ध्यान रखने योग्य बातें
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे हमेशा हर किसी के लिए सुरक्षित हों। किसी भी औषधि की तरह, पुनर्नवा का सेवन करते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। मेरी तकनीक वाली सोच मुझे हमेशा हर चीज़ के फायदे और नुकसान दोनों पहलुओं को देखने के लिए प्रेरित करती है, और आयुर्वेद में भी यही समझदारी काम आती है।
1. गर्भावस्था और स्तनपान: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पुनर्नवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए। कुछ जड़ी-बूटियां गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित नहीं मानी जातीं, और चूंकि इस विषय पर पर्याप्त वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सावधानी बरतना सबसे अच्छा है।
2. एलर्जी और संवेदनशीलता: कुछ लोगों को किसी खास जड़ी-बूटी से एलर्जी हो सकती है। यदि आपको पुनर्नवा या किसी अन्य पौधे से एलर्जी का इतिहास रहा है, तो इसके सेवन से बचें या बहुत सावधानी से इस्तेमाल करें। अगर आपको सेवन के बाद कोई असामान्य प्रतिक्रिया जैसे त्वचा पर चकत्ते, खुजली या सांस लेने में तकलीफ होती है, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करें।
3. अन्य दवाओं के साथ उपयोग (ड्रग इंटरेक्शन): यदि आप पहले से कोई एलोपैथिक या अन्य दवाएं ले रहे हैं, खासकर मूत्रवर्धक (diuretics), रक्तचाप की दवाएं, मधुमेह की दवाएं या गुर्दे/लीवर से संबंधित दवाएं, तो पुनर्नवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट को ज़रूर बताएं। पुनर्नवा में मूत्रवर्धक गुण होते हैं, और अगर आप पहले से ही मूत्रवर्धक दवाएं ले रहे हैं, तो यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैदा कर सकता है। यह अन्य दवाओं के प्रभाव को भी बदल सकता है।
4. निम्न रक्तचाप: पुनर्नवा का सेवन कुछ व्यक्तियों में रक्तचाप को कम कर सकता है। यदि आपको निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) की समस्या है, तो इसका सेवन सावधानी से करें और अपने रक्तचाप पर नज़र रखें।
5. सर्जरी से पहले: यदि आपकी कोई सर्जरी होने वाली है, तो सर्जरी से कम से कम दो हफ्ते पहले पुनर्नवा का सेवन बंद कर देना चाहिए। कुछ जड़ी-बूटियां रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
6. बच्चों के लिए: बच्चों को पुनर्नवा देने से पहले हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों के लिए खुराक और सुरक्षा के संबंध में विशिष्ट दिशानिर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
सबसे महत्वपूर्ण सलाह: डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें! मैं हमेशा इस बात पर ज़ोर देता हूँ कि भले ही जड़ी-बूटियां प्राकृतिक हों, लेकिन उनका उपयोग बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक आपकी शारीरिक प्रकृति, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और किसी भी अन्य चल रही चिकित्सा के आधार पर आपको सही मार्गदर्शन दे सकता है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि पुनर्नवा का उपयोग आपके लिए सुरक्षित और प्रभावी हो। खुद से इलाज करने की कोशिश न करें, खासकर अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
अच्छी गुणवत्ता वाले Punarnava की पहचान
आजकल बाज़ार में आयुर्वेदिक उत्पादों की भरमार है। ऐसे में, यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि कौन सा उत्पाद असली है और कौन सा नहीं। एक कंप्यूटर साइंस के छात्र के रूप में, मैं हमेशा डेटा और प्रमाणिकता पर ज़ोर देता हूँ, और यही बात आयुर्वेदिक उत्पादों पर भी लागू होती है। एक अच्छी गुणवत्ता वाला पुनर्नवा उत्पाद चुनना आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।
यहां कुछ बातें हैं जिनसे आप अच्छी गुणवत्ता वाले पुनर्नवा की पहचान कर सकते हैं:
1. प्रमाणित ब्रांड्स का चुनाव करें: हमेशा उन आयुर्वेदिक ब्रांड्स के उत्पादों का चुनाव करें जो बाज़ार में प्रतिष्ठित हैं और जिनके उत्पाद गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं। भारत में, Baidyanath, Dabur, Himalaya, Zandu, Patanjali जैसे ब्रांड्स लंबे समय से आयुर्वेदिक दवाएं बनाते आ रहे हैं और इनकी विश्वसनीयता अच्छी मानी जाती है। ये कंपनियां आमतौर पर शुद्धता और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान देती हैं।
2. उत्पाद की पैकेजिंग और लेबलिंग: अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों की पैकेजिंग हमेशा सील बंद और पेशेवर होती है। लेबल पर सभी जानकारी साफ-साफ लिखी होनी चाहिए:
- सामग्री (Ingredients): मुख्य जड़ी-बूटी (पुनर्नवा) और अगर कोई अन्य सामग्री है, तो उसका भी ज़िक्र होना चाहिए।
- निर्माता का नाम और पता: ब्रांड का पूरा नाम और संपर्क जानकारी।
- निर्माण की तारीख (Manufacturing Date) और समाप्ति की तारीख (Expiry Date): ये दोनों तारीखें ज़रूर देखें। एक्सपायरी डेट के बाद किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन न करें।
- बैच नंबर (Batch Number): यह उत्पाद की ट्रैसिबिलिटी के लिए ज़रूरी है।
- खुराक और उपयोग के निर्देश: स्पष्ट रूप से लिखे होने चाहिए।
3. FSSAI या आयुष मंत्रालय का लाइसेंस: भारत में आयुर्वेदिक उत्पादों को आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) या FSSAI द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। उत्पाद पर इनके लाइसेंस नंबर या लोगो का ज़िक्र हो सकता है, जो गुणवत्ता का एक संकेत है।
4. शुद्धता और मिलावट की जांच: यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर आप चूर्ण खरीद रहे हैं, तो उसकी गंध, रंग और बनावट पर ध्यान दें। पुनर्नवा का चूर्ण आमतौर पर थोड़ा भूरा या हल्का लाल रंग का होता है और इसमें एक विशिष्ट मिट्टी जैसी गंध होती है। अगर उसमें कोई अजीब गंध या रंग दिखे, तो संदेह करें।
5. ऑर्गेनिक या जंगली स्रोत: अगर उत्पाद ‘ऑर्गेनिक’ या ‘वाइल्डक्राफ्टेड’ (जंगली वातावरण से इकट्ठा किया गया) होने का दावा करता है, तो यह अक्सर बेहतर गुणवत्ता का संकेत होता है, क्योंकि इसमें की