परिचय
नमस्ते दोस्तों! मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से। आज आप मेरे इस ब्लॉग पर जुड़े हैं, यह जानकर मुझे सचमुच बहुत खुशी हो रही है। इस तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में, जहाँ हर तरफ़ भागदौड़ और तनाव है, वहाँ आयुर्वेद और योग एक ठंडी, सुकून देने वाली छाँव की तरह हैं। बचपन से मैंने उत्तराखंड की शांत वादियों में प्रकृति के करीब रहकर ज़िंदगी को महसूस किया है। हमारे पहाड़ों में आज भी लोग सुबह सूरज उगने से पहले उठते हैं, ताज़ी हवा में साँस लेते हैं, अपने खेतों में काम करते हैं और शाम को जल्दी सो जाते हैं। उनकी थाली में शुद्ध, ताज़ा और मौसमी भोजन होता है, और बीमार पड़ने पर अक्सर घर के बड़े-बुज़ुर्ग जड़ी-बूटियों से ही उपचार सुझाते हैं। यह एक ऐसी जीवनशैली है जो प्रकृति के नियमों के साथ चलती है, और शायद यही कारण है कि हमारे यहाँ के लोग आज भी इतने ऊर्जावान और स्वस्थ दिखते हैं।
इसके ठीक उलट, शहरी ज़िंदगी में हम देखते हैं कि लोग देर रात तक जाग