Shankhpushpi के फायदे, उपयोग और सावधानियां | आयुर्वेद

परिचय

नमस्ते दोस्तों, मैं पंकज, आपका दोस्त, जो आपको प्रकृति और विज्ञान के संगम से जुड़ी बातें बताता है। मैं मूल रूप से उत्तराखंड, हमारी प्यारी देवभूमि से हूँ, जहाँ की हवा में जड़ी-बूटियों की खुशबू और मिट्टी में सदियों पुराना ज्ञान रचा-बसा है। आप में से जो मुझे जानते हैं, उन्हें यह भी पता होगा कि मैंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। एक तरफ जहाँ आधुनिक तकनीक और लॉजिक मेरे दिमाग में घर कर गए, वहीं दूसरी तरफ मेरे पहाड़ी संस्कार और प्रकृति से जुड़ाव हमेशा मेरे दिल में रहा। आज के इस तेज-रफ्तार शहरी जीवन में, जहाँ हर दूसरा व्यक्ति तनाव, अनिद्रा, याददाश्त की कमजोरी या किसी न किसी छोटी-मोटी बीमारी से जूझ रहा है, वहाँ यह सोचना लाजमी है कि कहीं हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं? हमारे आस-पास केमिकल दवाओं का अम्बार लगा हुआ है, और अक्सर हम बिना सोचे-समझे उन्हें अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं।

उत्तराखंड की शांत वादियाँ, साफ हवा, और यहाँ के लोगों की सरल जीवनशैली – ये सब मेरे लिए सिर्फ यादें नहीं, बल्कि एक प्रेरणा हैं। वहाँ हर घर में दादी-नानी के नुस्खे, जड़ी-बूटियों का ज्ञान और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने का तरीका आज भी ज़िंदा है। इसके ठीक उलट, शहरी जीवन में हर काम की डेडलाइन, प्रदूषण, फास्ट फूड और स्क्रीन टाइम ने हमें कहीं न कहीं हमारी जड़ों से काट दिया है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मैं इन दोनों दुनियाओं के बीच का पुल बन सकता हूँ। अपनी कंप्यूटर साइंस की समझ का इस्तेमाल करके, मैं आयुर्वेद और योग के गहरे ज्ञान को आपके लिए सरल, तार्किक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करता हूँ। मेरा मकसद सिर्फ एक है: आपको जागरूक करना। आपको यह बताना कि प्रकृति ने हमें कितने अनमोल उपहार दिए हैं, और कैसे हम बिना किसी अतिशयोक्ति या झूठे दावों के, अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं।

आज हम जिस विषय पर बात करने वाले हैं, वह है एक ऐसी अद्भुत जड़ी-बूटी, जिसका नाम आपने शायद सुना होगा – शंखपुष्पी। आयुर्वेद में इसे बुद्धि और मन को शांति देने वाली दिव्य औषधि माना गया है। तो चलिए, बिना किसी देरी के, इस प्राकृतिक खजाने की गहराई में उतरते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे यह हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। याद रखिए, मेरा यह ब्लॉग किसी भी तरह से एलोपैथी या आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह एक पूरक रास्ता दिखाता है – एक ऐसा रास्ता जहाँ हम अपनी सेहत के लिए सिर्फ केमिकल दवाओं पर पूरी तरह निर्भर न रहें, बल्कि प्रकृति की शक्ति का भी सम्मान करें और उसका लाभ उठाएं।

Shankhpushpi क्या है और आयुर्वेद में इसका स्थान

दोस्तों, जब हम शंखपुष्पी का नाम सुनते हैं, तो अक्सर हमारे मन में दिमाग को तेज करने वाली किसी औषधि का ख्याल आता है। लेकिन शंखपुष्पी सिर्फ इतनी ही नहीं है, यह उससे कहीं ज्यादा है। असल में, शंखपुष्पी एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे आयुर्वेद में ‘मेध्य रसायन’ की श्रेणी में रखा गया है। ‘मेध्य’ का मतलब है जो बुद्धि और मस्तिष्क के कार्यों को बढ़ावा दे, और ‘रसायन’ का मतलब है जो शरीर को फिर से जीवंत करे और दीर्घायु प्रदान करे।

अगर हम इसके नाम पर गौर करें, तो ‘शंख’ का मतलब शंख और ‘पुष्पी’ का मतलब फूल। इसके फूल शंख की आकृति जैसे होते हैं, जो नीले या सफेद रंग के होते हैं, और यही इसकी पहचान है। यह जड़ी-बूटी भारत के कई हिस्सों में पाई जाती है, खासकर शुष्क और पथरीले इलाकों में। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों, जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में भी शंखपुष्पी का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसे हमेशा से मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए एक प्रमुख औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

आयुर्वेद के अनुसार, शंखपुष्पी मुख्य रूप से वात और पित्त दोष को शांत करने का काम करती है। यह हमारी ‘स्मृति’ (याददाश्त), ‘बुद्धि’ (समझने की क्षमता) और ‘धारणा शक्ति’ (ज्ञान को धारण करने की शक्ति) पर सीधा प्रभाव डालती है। इसे मस्तिष्क के लिए एक टॉनिक माना जाता है, जो मानसिक थकान को दूर करने और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है। मेरे उत्तराखंड में, जहाँ हर कोने में प्रकृति का वरदान छिपा है, वहाँ शंखपुष्पी को सदियों से बच्चे से लेकर बूढ़े तक, दिमाग को शांत और तेज रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के ज्ञान और प्रकृति के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ हमारा दिमाग हर समय ओवरलोड रहता है, शंखपुष्पी हमें मानसिक शांति और स्पष्टता प्रदान करने में सहायक हो सकती है। यह हमें प्रकृति के करीब लाने का एक और जरिया है, यह याद दिलाती है कि हमारे आसपास ही ऐसे कई समाधान मौजूद हैं, बस हमें उन्हें पहचानने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। यह बात मैं आपको अपने टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड के आधार पर भी कहना चाहता हूँ। जैसे एक सॉफ्टवेयर को ऑप्टिमाइज करने से उसकी परफॉरमेंस बढ़ती है, वैसे ही हमारे शरीर और दिमाग को प्राकृतिक रूप से पोषण देने से उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है। शंखपुष्पी हमारे दिमाग के लिए एक ऐसा ही प्राकृतिक ऑप्टिमाइजेशन टूल है, जिसका सदियों पुराना अनुभव इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

Shankhpushpi में मौजूद मुख्य जड़ी-बूटियाँ और उनके गुण

दोस्तों, जैसा कि मैंने पहले बताया, शंखपुष्पी एक अकेली जड़ी-बूटी है, जिसका वानस्पतिक नाम Convolvulus pluricaulis है। लेकिन बाजार में जब आप “शंखपुष्पी” नाम से कोई उत्पाद देखते हैं, तो वह अक्सर या तो सिर्फ इसी जड़ी-बूटी का चूर्ण होता है, या फिर यह कई अन्य मेध्य (दिमाग को लाभ पहुँचाने वाली) जड़ी-बूटियों का एक मिश्रण भी हो सकता है। मेरा मानना है कि किसी भी उत्पाद को समझने के लिए, उसके मूल तत्वों को समझना बहुत ज़रूरी है। तो आइए, पहले असली शंखपुष्पी (Convolvulus pluricaulis) में क्या गुण हैं, उस पर बात करते हैं।

असली शंखपुष्पी अपने आप में एक पूरा पैकेज है। इसमें ऐसे कई बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाए जाते हैं, जैसे एल्कलॉइड्स (शंखपुष्पीन), फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, और कौमारिन्स। ये सभी तत्व मिलकर शंखपुष्पी को उसकी विशेष क्षमताएं प्रदान करते हैं। इसके मुख्य गुणों में शामिल हैं:

सबसे पहले, मेध्य गुण: यह दिमाग की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करती है। यह याददाश्त, सीखने की क्षमता और एकाग्रता को सुधारने में सहायक हो सकती है। यह दिमाग की कोशिकाओं को पोषण देने और न्यूरोट्रांसमीटर (दिमाग के रसायन जो जानकारी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं) के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दूसरा, एंटी-स्ट्रेस और एंग्जायटी-रिलीफ गुण: शंखपुष्पी को एक बेहतरीन अनुकूलक (adaptogen) माना जाता है। इसका मतलब है कि यह शरीर को तनाव के अनुकूल ढलने में मदद करती है, जिससे तनाव और चिंता का स्तर कम होता है। यह दिमाग को शांत करने और बेचैनी को कम करने में सहायक हो सकती है, जिससे मन को स्थिरता मिलती है।

तीसरा, अनिद्रा में सहायक: मानसिक शांति प्रदान करने के कारण, शंखपुष्पी अच्छी नींद लाने में भी मदद कर सकती है। यह मन को शांत करके अनावश्यक विचारों को कम करती है, जिससे गहरी और आरामदायक नींद आने की संभावना बढ़ती है। यह कोई नींद की गोली नहीं है, बल्कि यह दिमाग को प्राकृतिक रूप से आराम देने में सहायता करती है।

चौथा, एंटीऑक्सीडेंट गुण: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। ये फ्री रेडिकल्स कोशिका क्षति का कारण बन सकते हैं, खासकर मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए। शंखपुष्पी इन फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करके मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान देती है।

अब, जैसा कि मैंने बताया, कुछ आयुर्वेदिक ब्रांड्स “शंखपुष्पी” नाम के उत्पादों में केवल Convolvulus pluricaulis ही नहीं, बल्कि कुछ और मेध्य जड़ी-बूटियाँ भी मिलाते हैं ताकि उसका प्रभाव और बढ़ जाए। इनमें से कुछ सामान्य जड़ी-बूटियाँ हैं:

* ब्राह्मी (Bacopa monnieri): यह भी एक प्रसिद्ध मेध्य रसायन है, जिसे याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। यह अक्सर शंखपुष्पी के साथ मिलकर काम करती है। * वचा (Acorus calamus): इसे भी दिमाग के लिए फायदेमंद माना जाता है, खासकर वाणी और स्मृति में सुधार के लिए। * अश्वगंधा (Withania somnifera): यह एक शक्तिशाली अनुकूलक है जो तनाव, चिंता और थकान को कम करने में मदद करती है, और अच्छी नींद को बढ़ावा देती है।

इन जड़ी-बूटियों का मिश्रण अक्सर एक सिनर्जेस्टिक प्रभाव पैदा करता है, यानी वे एक-दूसरे के गुणों को बढ़ाते हैं। लेकिन मेरा हमेशा यही सुझाव रहता है कि आप उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ें और समझें कि आप क्या ले रहे हैं। शुद्ध शंखपुष्पी का अपना महत्व है, और मिश्रणों का अपना। मेरा मुख्य फोकस हमेशा उस मूल जड़ी-बूटी पर रहता है जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं।

Shankhpushpi के संभावित फायदे

दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते हैं कि आयुर्वेद किसी चमत्कार का दावा नहीं करता, बल्कि यह शरीर और मन के संतुलन पर आधारित है। शंखपुष्पी के साथ भी यही बात लागू होती है। यह कोई जादुई गोली नहीं है जो तुरंत आपकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगी, लेकिन पारंपरिक अनुभवों और सदियों के उपयोग के आधार पर, इसके कई संभावित फायदे देखे गए हैं, जिन्हें मैं आपके साथ बिल्कुल ईमानदारी से साझा करना चाहता हूँ।

सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण फायदा है मानसिक स्पष्टता और याददाश्त में सुधार। आज की दुनिया में, जहाँ हमें इतनी सारी जानकारियों को प्रोसेस करना होता है, हमारा दिमाग अक्सर थका हुआ महसूस करता है। शंखपुष्पी को दिमाग की कोशिकाओं को पोषण देने और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करने वाला माना जाता है। इससे याददाश्त कमजोर होने की समस्या, खासकर उम्र के साथ होने वाले हल्के संज्ञानात्मक गिरावट में, कुछ हद तक राहत मिल सकती है। यह छात्रों और उन पेशेवरों के लिए भी फायदेमंद हो सकती है जिन्हें अपनी एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बढ़ाना होता है।

दूसरा बड़ा फायदा है तनाव और चिंता को कम करना। शहरी जीवन में तनाव और चिंता एक आम बात बन गई है। शंखपुष्पी एक प्राकृतिक एडाप्टोजेन के रूप में काम करती है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव के अनुकूल ढलने में मदद करती है। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को संतुलित करने में सहायक हो सकती है, जिससे मन शांत और स्थिर महसूस करता है। यह बेचैनी, घबराहट और सामान्यीकृत चिंता के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती है, जिससे आपको दैनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है।

तीसरा संभावित लाभ अनिद्रा और नींद की गुणवत्ता में सुधार है। जब मन शांत होता है, तो नींद अपने आप बेहतर हो जाती है। शंखपुष्पी मन को शांत करके, अनावश्यक विचारों को कम करके और दिमाग को आराम देकर अच्छी नींद लाने में मदद कर सकती है। यह आपको जल्दी सोने और गहरी, आरामदायक नींद का अनुभव करने में मदद कर सकती है, जिससे आप सुबह तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करते हैं। यह कोई सेडेटिव नहीं है, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया को सपोर्ट करती है।

चौथा, एकाग्रता और फोकस बढ़ाना। आज के डिजिटल युग में हमारा ध्यान बड़ी आसानी से भटक जाता है। शंखपुष्पी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाकर और मानसिक थकान को कम करके आपकी एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाने में मदद कर सकती है। यह छात्रों और उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जिन्हें लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, कुछ पारंपरिक उपयोगों के अनुसार, शंखपुष्पी रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकती है, खासकर जब तनाव के कारण रक्तचाप बढ़ता है। इसमें कुछ हल्के एंटी-डिप्रेसेंट गुण भी माने जाते हैं, जो हल्के अवसाद के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं, हालांकि गंभीर अवसाद के लिए इसे डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह मस्तिष्क को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाने वाले एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करती है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाओं का स्वास्थ्य बना रहता है।

यह समझना ज़रूरी है कि ये सभी फायदे पारंपरिक ज्ञान और अनुभवों पर आधारित हैं। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, और परिणाम भी अलग-अलग हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शंखपुष्पी एक प्राकृतिक पूरक है, न कि किसी बीमारी का सीधा इलाज। इसे एक स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ लेने पर ही इसके सर्वोत्तम परिणाम मिल सकते हैं। मेरा हमेशा यही मानना रहा है कि प्रकृति हमें राह दिखाती है, लेकिन चलना हमें खुद पड़ता है।

Shankhpushpi का उपयोग कैसे करें

दोस्तों, किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का सही उपयोग उसकी प्रभावशीलता को बढ़ा देता है। शंखपुष्पी भी इसका अपवाद नहीं है। इसका उपयोग कैसे करें, इसकी जानकारी आपको एक बेहतर अनुभव देगी। हालाँकि, मैं हमेशा कहता हूँ कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (प्रकृति) और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी नई चीज़ को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले हमेशा एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना सबसे अच्छा रहता है। मैं यहाँ आपको सामान्य जानकारी और पारंपरिक तरीकों के आधार पर कुछ सुझाव दे रहा हूँ।

शंखपुष्पी कई रूपों में उपलब्ध होती है: चूर्ण (पाउडर), सिरप, कैप्सूल या टैबलेट।

चूर्ण (पाउडर) का उपयोग: * मात्रा: आमतौर पर, वयस्कों के लिए 3-6 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) चूर्ण दिन में एक या दो बार लेने की सलाह दी जाती है। बच्चों के लिए मात्रा कम होती है और चिकित्सक की सलाह से ही दी जानी चाहिए। * किसके साथ: इसे गुनगुने पानी या दूध के साथ लेना सबसे अच्छा माना जाता है। दूध के साथ लेने से इसके मेध्य गुणों का लाभ अधिक मिल सकता है, क्योंकि दूध खुद एक पौष्टिक आहार है। * कब लें: इसे सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद और शाम को भोजन से पहले या सोने से पहले लिया जा सकता है। मानसिक शांति और अच्छी नींद के लिए, इसे रात में सोने से पहले लेना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

सिरप का उपयोग: * मात्रा: बाजार में कई ब्रांड शंखपुष्पी सिरप बनाते हैं। इनकी मात्रा आमतौर पर 10-20 मिलीलीटर (लगभग 2-4 चम्मच) दिन में एक या दो बार होती है। बच्चों के लिए मात्रा कम होती है। * किसके साथ: इसे सीधे या थोड़े पानी में मिलाकर लिया जा सकता है। * कब लें: आमतौर पर भोजन के बाद इसे लेने की सलाह दी जाती है।

कैप्सूल/टैबलेट का उपयोग: * मात्रा: ये आमतौर पर 250 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम की खुराक में आते हैं। दिन में एक या दो कैप्सूल/टैबलेट लेने की सलाह दी जाती है। * किसके साथ: इन्हें पानी के साथ लेना चाहिए। * कब लें: भोजन के बाद या चिकित्सक के निर्देशानुसार।

कुछ महत्वपूर्ण बातें: * लगातार उपयोग: आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों का असर धीरे-धीरे होता है। शंखपुष्पी के पूर्ण लाभ देखने के लिए इसे कम से कम कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक नियमित रूप से लेना पड़ सकता है। धैर्य रखना यहाँ बहुत ज़रूरी है। * व्यक्तिगतकरण: जैसा कि मैंने कहा, हर शरीर अलग होता है। आपकी उम्र, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति और दोषों के संतुलन के आधार पर खुराक और सेवन का समय बदल सकता है। इसीलिए किसी अनुभवी वैद्य की सलाह बहुत मायने रखती है। * अन्य दवाओं के साथ: यदि आप पहले से कोई अन्य दवा ले रहे हैं, तो शंखपुष्पी का सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक को अवश्य बताएं। * शुरुआत: हमेशा कम खुराक से शुरुआत करें और देखें कि आपका शरीर कैसी प्रतिक्रिया दे रहा है। यदि कोई असुविधा महसूस हो, तो तुरंत सेवन बंद कर दें और विशेषज्ञ से सलाह लें।

मेरे अनुभव में, प्राकृतिक उपचारों का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उन्हें अपनी जीवनशैली का एक अभिन्न अंग बनाया जाए। सिर्फ शंखपुष्पी लेने से सब कुछ ठीक नहीं होगा, इसके साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और ध्यान या योग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब ये सब एक साथ काम करते हैं, तभी हमें प्रकृति के वरदान का पूरा लाभ मिल पाता है।

सावधानियां और ध्यान रखने योग्य बातें

दोस्तों, मैं हमेशा कहता हूँ कि ज्ञान शक्ति है, और किसी भी चीज़ का उपयोग करने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना बहुत ज़रूरी है, खासकर जब बात हमारे स्वास्थ्य की हो। शंखपुष्पी एक प्राकृतिक और आमतौर पर सुरक्षित जड़ी-बूटी मानी जाती है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। मेरा टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड मुझे सिखाता है कि किसी भी सिस्टम में एरर या बग से बचने के लिए हमें सभी संभावित परिदृश्यों पर विचार करना चाहिए, और स्वास्थ्य के मामले में भी यह उतना ही सच है।

सबसे पहले, गर्भावस्था और स्तनपान। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को शंखपुष्पी का सेवन करने से बचना चाहिए, या केवल चिकित्सक की कड़ी निगरानी में ही करना चाहिए। इस संबंध में पर्याप्त वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है कि यह शिशु पर क्या प्रभाव डाल सकती है, इसलिए सावधानी बरतना ही सबसे अच्छा है।

दूसरा, एलर्जी की प्रतिक्रियाएं। यद्यपि यह दुर्लभ है, कुछ व्यक्तियों को शंखपुष्पी या इसमें मौजूद किसी अन्य घटक से एलर्जी हो सकती है। यदि आपको शंखपुष्पी लेने के

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