परिचय
नमस्ते दोस्तों! मैं पंकज, देवभूमि उत्तराखंड से, और एक बार फिर आपका स्वागत करता हूँ अपने ब्लॉग पर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहाँ हर तरफ तेज़ रफ़्तार और तनाव है, मुझे लगता है कि हम अपनी जड़ों से, अपनी प्रकृति से कहीं दूर होते जा रहे हैं। याद है मुझे वो बचपन जब उत्तराखंड के शांत पहाड़ों में, नदियों के किनारे, दादा-दादी के नुस्खों और घर के खाने से ही हर छोटी-मोटी दिक्कत का इलाज हो जाता था। तब न इतनी दवाइयाँ थीं, न इतने डॉक्टर, फिर भी लोग ज़्यादा स्वस्थ और खुशहाल दिखते थे। आज जब मैं शहरों में देखता हूँ तो पाता हूँ कि लोग एक गोली से दूसरी गोली तक पहुँच गए हैं, और शरीर पर केमिकल का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।
मैं खुद कंप्यूटर साइंस का छात्र रहा हूँ। लॉजिक, डेटा और कोडिंग की दुनिया में रहते हुए भी मेरा मन हमेशा इस बात पर विचार करता रहा कि आखिर प्रकृति के पास हमारे लिए क्या है। मैंने देखा है कि कैसे एक छोटा सा बदलाव, जैसे सही खाना या थोड़ा योग, हमारे पूरे सिस्टम को ठीक कर सकता है। मेरा यह ब्लॉग शुरू करने का मकसद यही है कि मैं अपने तकनीकी बैकग्राउंड का इस्तेमाल करके आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़ी जानकारी को आप तक एक तार्किक, सहज और भरोसेमंद तरीके से पहुँचा सकूँ। मेरा मानना है कि हमें अपनी सेहत के लिए पूरी तरह से केमिकल दवाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रकृति और आयुर्वेद के ज्ञान को भी समझना चाहिए। यहाँ आपको कोई चमत्कारी दावे नहीं मिलेंगे, बल्कि मिलेगी ईमानदारी, संतुलन और सामान्य अनुभव पर आधारित विश्वसनीय जानकारी।
क्या है त्रिफला और आयुर्वेद में इसका स्थान
आज जिस आयुर्वेदिक उत्पाद के बारे में हम बात करेंगे, उसका नाम है त्रिफला। यह नाम आपने ज़रूर सुना होगा, क्योंकि आयुर्वेद में इसे किसी रत्न से कम नहीं माना जाता। “त्रिफला” शब्द का अर्थ ही है “तीन फल” – त्रि यानी तीन और फला यानी फल। ये कोई एक फल नहीं है, बल्कि तीन बेहद शक्तिशाली फलों का एक अनूठा मिश्रण है। आयुर्वेद में त्रिफला को “रसायन” की श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को फिर से जीवंत करने, बीमारियों से लड़ने और लंबी उम्र देने वाला है। इसे हजारों सालों से पाचन से लेकर आँखों की सेहत तक, कई तरह की समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में त्रिफला का बहुत सम्मान है। इसे सिर्फ एक औषधि नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से साफ करने और संतुलन बनाने वाला एक महत्वपूर्ण सहायक माना गया है। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे प्रमुख आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह शरीर के तीनों दोषों – वात, पित्त और कफ – को संतुलित करने की क्षमता रखता है, जो आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ रहने की कुंजी है। इसका उपयोग मुख्य रूप से पाचन तंत्र को मजबूत करने, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसकी सौम्य प्रकृति के कारण इसे लंबे समय तक भी इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते सही मात्रा और तरीके का ध्यान रखा जाए।
त्रिफला में मौजूद मुख्य जड़ी-बूटियाँ और उनके गुण
तो आइए, अब समझते हैं कि वे कौन से तीन फल हैं जो मिलकर त्रिफला को इतना खास बनाते हैं और उनके क्या गुण हैं:
1. आंवला (Emblica officinalis / Indian Gooseberry):
आंवला त्रिफला का पहला और शायद सबसे प्रसिद्ध घटक है। इसे आयुर्वेद में ‘अमृत फल’ भी कहा जाता है। आंवला विटामिन सी का एक अद्भुत स्रोत है, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत ज़रूरी है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। स्वाद में यह खट्टा होता है, लेकिन इसका विपाक (पाचन के बाद का असर) मीठा होता है। यह पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है। आंवला पाचन को सुधारता है, लीवर को सपोर्ट करता है, बालों और त्वचा के लिए अच्छा है और आँखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। यह शरीर को ठंडक भी देता है।
2. हरीतकी (Terminalia chebula / Chebulic Myrobalan):
हरीतकी, जिसे हरड़ भी कहते हैं, त्रिफला का दूसरा महत्वपूर्ण घटक है। इसे ‘औषधियों की रानी’ या ‘जीवन देने वाला’ भी कहा जाता है। हरीतकी मुख्य रूप से वात दोष को संतुलित करने में मदद करती है। इसका स्वाद कसैला, कड़वा, मीठा, खट्टा और तीखा होता है – यानी इसमें पांचों रस मौजूद होते हैं, सिर्फ नमकीन को छोड़कर। यह अपने मृदु विरेचक (हल्के रेचक) गुणों के लिए जानी जाती है, जिसका अर्थ है कि यह कब्ज़ को दूर करने में बहुत प्रभावी है, लेकिन यह पेट पर कठोर नहीं होती। हरीतकी पाचन क्रिया को सुधारती है, आँतों की सफाई करती है और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य और तंत्रिका तंत्र के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
3. बिभीतकी (Terminalia bellirica / Belleric Myrobalan):
बिभीतकी, जिसे बहेड़ा भी कहते हैं, त्रिफला का तीसरा घटक है। यह मुख्य रूप से कफ दोष को संतुलित करने में मदद करती है। बिभीतकी का स्वाद कसैला होता है। यह श्वसन प्रणाली के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है। यह फेफड़ों और श्वसन मार्ग से अतिरिक्त बलगम को हटाने में मदद करती है, जिससे श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है। बिभीतकी पाचन को भी सुधारती है और शरीर से अमा (विषैले पदार्थ) को बाहर निकालने में सहायता करती है। यह बालों के स्वास्थ्य और आँखों के लिए भी गुणकारी मानी जाती है।
इन तीनों फलों का मिश्रण इस तरह से तैयार किया जाता है कि वे एक-दूसरे के गुणों को बढ़ाएँ और एक संतुलित प्रभाव दें। आंवला, हरीतकी और बिभीतकी का अनुपात पारंपरिक रूप से 1:2:4 बताया जाता है, हालांकि आजकल कई निर्माता इन्हें समान अनुपात में भी इस्तेमाल करते हैं। यह संतुलन ही त्रिफला को इतना प्रभावी बनाता है कि यह शरीर के हर हिस्से पर सकारात्मक प्रभाव डाल सके।
त्रिफला के संभावित फायदे
जैसा कि मैंने पहले बताया, त्रिफला आयुर्वेद में एक बहुत ही सम्मानित रसायन है, और इसके कई पारंपरिक फायदे बताए गए हैं। यहाँ मैं कुछ सामान्य और अनुभवसिद्ध लाभों का ज़िक्र कर रहा हूँ, बिना किसी चमत्कारी या तुरंत असर के दावे के:
1. पाचन तंत्र को दुरुस्त रखना: यह त्रिफला का सबसे प्रसिद्ध लाभ है। यह कब्ज़ से राहत दिलाने में मदद करता है और आँतों की नियमित गति को बनाए रखता है। यह सिर्फ एक रेचक नहीं है, बल्कि यह पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है और भोजन के पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है। जिन लोगों को अक्सर पेट फूलने, गैस या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें इससे फायदा मिल सकता है।
2. शरीर की अंदरूनी सफाई (डिटॉक्सिफिकेशन): त्रिफला शरीर से विषैले पदार्थों, जिन्हें आयुर्वेद में ‘अमा’ कहते हैं, को बाहर निकालने में सहायक है। यह आँतों की दीवारों से चिपके हुए अपशिष्ट पदार्थों को साफ करता है, जिससे शरीर अंदर से साफ और हल्का महसूस होता है। यह एक सौम्य डिटॉक्सिफायर है जो शरीर के प्राकृतिक शुद्धि तंत्र को मजबूत करता है।
3. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना: आंवला में भरपूर विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो त्रिफला को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार बनाते हैं। नियमित सेवन से शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होता है।
4. आँखों के स्वास्थ्य के लिए: त्रिफला को पारंपरिक रूप से आँखों की रोशनी और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसे अक्सर आँखों की थकान, लालिमा और कुछ सामान्य समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग आँखों को धोने के लिए इसके पानी का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
5. त्वचा और बालों का स्वास्थ्य: शरीर के अंदर से सफाई होने और पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होने से त्वचा और बालों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। त्रिफला के एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को स्वस्थ रखने और असमय बुढ़ापे के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह बालों को मज़बूत बनाने और उनकी चमक बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
6. वज़न प्रबंधन में सहायक: सीधे तौर पर वज़न कम करने का दावा नहीं किया जा सकता, लेकिन त्रिफला पाचन को सुधारकर, शरीर से विषैले पदार्थों को हटाकर और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करके परोक्ष रूप से वज़न प्रबंधन में मदद कर सकता है। स्वस्थ पाचन तंत्र ही स्वस्थ शरीर की नींव है।
7. सूजन कम करने में: त्रिफला में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन (inflammation) को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह इसे कई पुरानी बीमारियों में फायदेमंद बना सकता है, जहाँ सूजन एक मुख्य कारक होती है।
यह समझना ज़रूरी है कि त्रिफला कोई जादुई गोली नहीं है जो रातोंरात सब कुछ ठीक कर दे। इसके फायदे धीरे-धीरे और नियमित उपयोग से ही मिलते हैं, और यह स्वस्थ आहार और जीवनशैली का पूरक है, न कि उसका विकल्प।
त्रिफला का उपयोग कैसे करें
त्रिफला का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है, और इसकी मात्रा व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और उद्देश्य पर निर्भर करती है। यहाँ मैं कुछ सामान्य तरीके बता रहा हूँ:
1. त्रिफला चूर्ण (पाउडर): यह त्रिफला का सबसे पारंपरिक और आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला रूप है।
- मात्रा: आमतौर पर 1 से 2 चम्मच (लगभग 3-6 ग्राम) त्रिफला चूर्ण।
- कब और किसके साथ:
- कब्ज़ और पाचन के लिए: रात को सोने से पहले, एक गिलास गुनगुने पानी के साथ। आप इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं।
- डिटॉक्स और सामान्य स्वास्थ्य के लिए: सुबह खाली पेट, गुनगुने पानी के साथ। कुछ लोग इसे शहद और घी के मिश्रण के साथ भी लेते हैं, जिसे “त्रिफला रसायन” कहते हैं।
2. त्रिफला टैबलेट या कैप्सूल: यह उनके लिए सुविधाजनक है जिन्हें चूर्ण का स्वाद पसंद नहीं आता या जो यात्रा कर रहे होते हैं।
- मात्रा: आमतौर पर 1 से 2 टैबलेट/कैप्सूल, दिन में एक या दो बार। उत्पाद के पैकेट पर दी गई खुराक का पालन करें।
- कब और किसके साथ: भोजन के बाद या रात को सोने से पहले, पानी के साथ।
3. आँखों के लिए (बाहरी उपयोग):
- एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को एक गिलास पानी में रात भर भिगो दें। सुबह इस पानी को छानकर आँखों को धोएँ। यह आँखों की जलन और थकान कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बिना न करें, और सुनिश्चित करें कि पानी अच्छी तरह से छना हुआ हो ताकि कोई कण आँखों में न जाए।
कुछ ज़रूरी बातें:
- शुरुआत कम मात्रा से करें: हमेशा कम मात्रा से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ, ताकि आपका शरीर इसके प्रति अनुकूल हो सके।
- पर्याप्त पानी पिएँ: त्रिफला का सेवन करते समय खूब पानी पीना बहुत ज़रूरी है, खासकर यदि आप कब्ज़ के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं।
- व्यक्तिगत भिन्नता: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। एक व्यक्ति के लिए जो मात्रा और तरीका सही है, वह दूसरे के लिए अलग हो सकता है। अपनी शारीरिक प्रकृति (दोष) और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सर्वोत्तम उपयोग के लिए किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।
- स्वाद: त्रिफला चूर्ण का स्वाद कसैला, कड़वा और थोड़ा खट्टा होता है। यदि आपको स्वाद पसंद नहीं आता, तो आप इसे शहद के साथ या कैप्सूल के रूप में ले सकते हैं।
याद रखें, त्रिफला एक प्राकृतिक उपाय है, और इसके प्रभाव धीरे-धीरे दिखते हैं। धैर्य और नियमितता महत्वपूर्ण है।
सावधानियां और ध्यान रखने योग्य बातें
भले ही त्रिफला एक प्राकृतिक और आमतौर पर सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधि है, फिर भी कुछ सावधानियां और बातें हैं जिनका ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि इसका सुरक्षित और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके:
1. गर्भावस्था और स्तनपान: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को त्रिफला का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए। कुछ जड़ी-बूटियाँ गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित नहीं मानी जातीं, और त्रिफला के रेचक गुणों के कारण सावधानी बरतनी ज़रूरी है।
2. एलर्जी और संवेदनशीलता: यदि आपको त्रिफला के किसी भी घटक (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) से एलर्जी है, तो इसका सेवन न करें। अगर सेवन के बाद कोई असामान्य प्रतिक्रिया जैसे त्वचा पर चकत्ते, खुजली या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत इसका उपयोग बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करें।
3. अन्य दवाओं के साथ उपयोग: यदि आप किसी अन्य बीमारी के लिए कोई एलोपैथिक या अन्य दवाएं ले रहे हैं, तो त्रिफला का सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। त्रिफला कुछ दवाओं के अवशोषण या प्रभाव को प्रभावित कर सकता है, खासकर रक्त पतला करने वाली दवाएं (blood thinners) या मधुमेह की दवाओं के साथ।
4. दस्त या लूज मोशन: यदि आपको पहले से ही दस्त या लूज मोशन की समस्या है, तो त्रिफला का सेवन न करें। इसके रेचक गुण समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
5. बच्चों के लिए: बच्चों को त्रिफला देने से पहले हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें। बच्चों के लिए खुराक और तरीका अलग हो सकता है।
6. सर्जरी से पहले: यदि आपकी कोई सर्जरी होने वाली है, तो सर्जरी से कम से कम दो सप्ताह पहले त्रिफला का सेवन बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकता है या दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है।
7. दीर्घकालिक उपयोग और खुराक: त्रिफला का लंबे समय तक उपयोग आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसकी सही खुराक और अवधि के लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है। अत्यधिक मात्रा में सेवन से पेट में ऐंठन, गैस या दस्त हो सकते हैं।
8. तासीर का ध्यान रखें: त्रिफला की तासीर थोड़ी ठंडी मानी जाती है। यदि आपकी प्रकृति बहुत ठंडी है या आपको अक्सर ठंड लगती है, तो इसे गुनगुने पानी के साथ या थोड़ी कम मात्रा में लें।
याद रखें, आयुर्वेद में हर व्यक्ति की प्रकृति (प्रकृति) अलग होती है। जो एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद है, वह दूसरे के लिए उतना प्रभावी न हो। इसलिए, किसी भी नए सप्लीमेंट या औषधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना सबसे अच्छा तरीका है।
अच्छी गुणवत्ता वाले त्रिफला की पहचान
आजकल बाज़ार में आयुर्वेदिक उत्पादों की भरमार है, और ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले त्रिफला को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन कुछ बातें हैं जिनका ध्यान रखकर आप एक शुद्ध और प्रभावी उत्पाद चुन सकते हैं:
1. विश्वसनीय ब्रांड चुनें: हमेशा ऐसे ब्रांड्स से त्रिफला खरीदें जिनकी बाज़ार में अच्छी प्रतिष्ठा हो और जो गुणवत्ता के लिए जाने जाते हों। Baidyanath, Dabur, Himalaya, Zandu जैसी कंपनियाँ लंबे समय से आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं और इनकी गुणवत्ता पर आमतौर पर भरोसा किया जा सकता है। हालाँकि, केवल ब्रांड नाम पर न जाएँ, उत्पाद की पैकेजिंग और लेबल को भी ध्यान से पढ़ें।
2. ऑर्गेनिक और शुद्धता: कोशिश करें कि ऑर्गेनिक या प्रमाणित शुद्ध त्रिफला खरीदें। इसका मतलब है कि फल बिना कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों के उगाए गए हैं। लेबल पर “organic” या “pure” जैसे शब्द देखें। शुद्धता का मतलब है कि इसमें कोई मिलावट, कृत्रिम रंग या संरक्षक नहीं मिलाए गए हों।
3. स्रोत और प्रसंस्करण: कुछ कंपनियाँ अपने उत्पादों के फलों के स्रोत और प्रसंस्करण (processing) के तरीकों के बारे में जानकारी देती हैं। यह जानना कि फल कहाँ से आते हैं और उन्हें कैसे संसाधित किया जाता है, गुणवत्ता को समझने में मदद करता है।
4. भारी धातुओं की जाँच: यह एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। कुछ आयुर्वेदिक उत्पादों में भारी धातुओं (जैसे सीसा, पारा, आर्सेनिक) के अंश पाए जा सकते हैं, खासकर यदि वे अच्छी गुणवत्ता नियंत्रण के तहत नहीं बनाए गए हों। यदि उत्पाद पर “heavy metal tested” या “lab tested” का उल्लेख हो, तो यह एक अच्छा संकेत है। प्रतिष्ठित ब्रांड आमतौर पर इन मानकों का पालन करते हैं।
5. पैकेजिंग: अच्छी गुणवत्ता वाला त्रिफला एक एयरटाइट, नमी-रोधी और प्रकाश-अवरोधक पैकेजिंग में आना चाहिए। इससे उत्पाद की ताजगी और शक्ति बनी रहती है। अगर चूर्ण है, तो देखें कि पैकेजिंग सील बंद हो और कोई नमी न हो।
6. गंध और रंग: त्रिफला चूर्ण का रंग हल्का भूरा या हरा-भूरा होता है। इसकी एक विशिष्ट, थोड़ी कसैली और प्राकृतिक सुगंध होती है। अगर इसमें कोई अजीब या रासायनिक गंध आती है, तो हो सकता है कि वह शुद्ध न हो।
7. निर्माण और समाप्ति तिथि: हमेशा उत्पाद की निर्माण तिथि (manufacturing date) और समाप्ति तिथि (expiry date) की जांच करें। ताज़ा उत्पाद हमेशा बेहतर होता है।
8. फॉर्मूलेशन का अनुपात: हालांकि यह हर बार जांचना संभव नहीं होता, फिर भी कुछ निर्माता त्रिफला के तीनों घटकों (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) के अनुपात का उल्लेख करते हैं। पारंपरिक रूप से 1:2:4 का अनुपात माना जाता है, लेकिन 1:1:1 का अनुपात भी आम है। यह जानकारी होने से आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आप क्या ले रहे हैं।
इन बातों का ध्यान रखकर आप अच्छी गुणवत्ता वाले त्रिफला का चुनाव कर सकते हैं, जो आपको इसके अधिकतम लाभ प्रदान करेगा।
मेरे व्यक्तिगत विचार और सुझाव
दोस्तों, मेरा मानना है कि आयुर्वेद और योग सिर्फ बीमार होने पर लेने वाली दवा या सिर्फ सुबह करने वाले व्यायाम नहीं हैं। यह एक जीवनशैली है, जीने का एक तरीका है। मेरा कंप्यूटर साइंस का बैकग्राउंड मुझे यह सिखाता है कि किसी भी सिस्टम को सही से काम करने के लिए उसके हर हिस्से का सही संतुलन में होना ज़रूरी है। हमारा शरीर भी एक ऐसा ही जटिल और अद्भुत सिस्टम है।
उत्तराखंड, जहाँ से मैं आता हूँ, वह देवभूमि है जहाँ प्रकृति और जीवन का गहरा संबंध है। यहाँ की हवा, पानी, जड़ी-बूटियाँ – सब कुछ हमें प्राकृतिक जीवनशैली की ओर इशारा करता है। मैंने अपनी आँखों से देखा है कि कैसे हमारे बुजुर्ग बिना किसी केमिकल दवा के, सिर्फ घर के नुस्खों, योग और संतुलित आहार से अपनी सेहत का ध्यान रखते थे। त्रिफला जैसी चीज़ें उसी प्राचीन ज्ञान का हिस्सा हैं