तुलसी क्या है, तथा तुलसी के फायदे, औषधि गुण ।

हिंदू धर्म में तुलसी का अत्यंत महत्व है तथा इसे पूजनीय माना जाता है हिंदू धर्म के कई ग्रंथों में तुलसी का कई बार वर्णन हुआ है। इसके साथ ही आयुर्वेद में भी तुलसी के चमत्कारिक औषधीय गुणों का उल्लेख मिलता है, आयुर्वेद के अनुसार तुलसी कई प्रकार के रोगों को दूर करने में सक्षम है।

tulsi kya hai

आज की इस लेख में हम आपको तुलसी के इन्हीं चमत्कारिक औषधीय गुणों के विषय में बताने जा रहे हैं , यदि आपको आज का यह लेख अच्छा लगे तो आप इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य सांझा कीजिएगा।

तुलसी क्या है (नाम, वंश इत्यादि)?

तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसका वनस्पतिक नाम Ocimum sanctum Linn. (ओसीमम् सेंक्टम) तथा इसके कुल का नाम Lamiaceae (लैमिएसी) है। तुलसी के पौधे की ऊंचाई सामान्य तौर पर 30 से 60 सेंटीमीटर तक होती है, तुलसी की कई प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से राम तुलसी (श्वेत तुलसी ) तथा कृष्ण तुलसी प्रमुख है । तुलसी का प्रयोग आयुर्वेद में कई प्रकार की बीमारियों में किया जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

तुलसी को अनेक नामों से जाना जाता है जिनमें से कुछ इस प्रकार है —

  • तमित – तुलशी (Tulashi)
  • तमिल – तुलशी (Tulashi) 
  •  तेलुगु- गग्गेर चेटु (Gagger chettu) 
  •  संस्कृत : तुलसी, सुरसा, देवदुन्दुभि, अपेतराक्षसी, सुलभा, बहुमञ्जरी, गौरी, भूतनी 
  •  हिंदी : तुलसी, वृन्दा >
  • ओड़िआ: तुलसी (Tulasi) 
  •  कन्नड़ : एरेड तुलसी (Ared tulsi) >
  • गुजरती : तुलसी (Tulasi) 
  • बंगाली : तुलसी (Tulasi) 
  • नेपाली : तुलसी (Tulasi) 
  • मराठी : तुलस (Tulas) 
  • मलयालम : कृष्णतुलसी (Krishantulasi) 
  •  अरबी : दोहश (Dohsh) 

तुलसी कहां पाई जाती है ?

तुलसी को उगाने के लिए किसी भी प्रकार की विशेष जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है, यह हमारे आसपास के घरों में बहुत ही आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

यदि आप भी अपने घर में तुलसी लगाना चाहते हैं तो आप किसी भी गमले में इसे लगा सकते हैं तथा इसके औषधीय गुणों का भरपूर लाभ ले सकते हैं।

तुलसी के औषधिय गुण एवं उपयोग ( tulsi ke aushadhi gun evan upayog)

तुलसी के पत्ते तथा बीज औषधि गुणों से परिपूर्ण होते हैं, जोकि कई प्रकार के रोगों आदि में प्रयोग किए जा सकते हैं। यदि आप तुलसी के पत्तों का सेवन करना चाहते हैं तो आप इन्हें सीधे तुलसी के पीधे से तोड़कर भी खा सकते हैं, इसके अलावा आप तुलसी के पत्तों तथा इनके बीजों का चूर्ण बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। Preview तुलसी के पत्तों का सेवन बुखार, संक्रमण, पेट दर्द, मलेरिया इत्यादि में अत्यधिक लाभकारी है. इसके अलावा भी तुलसी की अनेक औषधीय गुण है जो अब हम आपको बताने जा रहे हैं।

 तुलसी के औषधिय गुण।

 तुलसी का रस है रतौंधी में फायदेमंद (tulsi ka ras hai ratondhi mai faydemand)

 यदि आप रतौंधी की समस्या से पीड़ित है तो आप प्रतिदिन आंखों में दो दो बूंद श्याम तुलसी का रस डाल सकते हैं, 14 दिनों तक श्याम तुलसी का रस आंखों में डालने से रतौंधी सही होती है, और इतना ही नहीं यदि आप अपने आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप इसका प्रयोग काजल के रूप में भी कर सकते हैं। 

तुलसी है हृदय संबंधी रोग में लाभकारी (tulsi hai hridav sambandhi rog mai labhkari)

तुलसी हृदय संबंधी रोग में भी लाभकारी है, 10 तुलसी के पत्तों में 5 काली मिर्च तथा 4 बादाम मिलाकर पीस दे तथा एक चम्मच शहद तथा आधे गिलास पानी के साथ इसका सेवन करें, ऐसा करने से लाभ होगा।

दांत दर्द में है लाभकारी (dant dard mai hai labhkari)|

तुलसी के पत्ते दांत दर्द में भी लाभकारी सिद्ध होते हैं, यदि आपको दांत दर्द की समस्या है तो आप काली मिर्च तथा तुलसी के पत्तों को मिलाकर गोली बना ले तथा दांत के नीचे दबा लें, ऐसा करने से आपको दांत दर्द में राहत मिलेगी।

पीरियड्स के दिनों में है लाभकारी (peiods ke dino mai hailabhkari)|

तुलसी के पत्तों का नियमित रूप से सेवन करने से पीरियड्स की अनियमितताएं दूर होती है।

पथरी के लिए है लाभकारी ( pathri ke liye hai labhkari)|

यदि आप पधरी के कारण परेशान है तो आप पत्तों को उबालकर उनका जूस बना ले, तथा प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करें,ऐसा करने से आपको लाभ होगा।

गले में खराश व गला बैठने की समस्या से दिलाता है राहत ( gale mai kharsh , gala bathne ki samasaya se dilata hai rahat)

यदि आपके गले में खराश है, अथवा गला बैठ गया है तो तुलसी के रस को हल्की गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करें ऐसा करने से आपको गले की खराश तथा गला बैठने की समस्या से राहत मिलेगी।

खांसी की समस्या के लिए लाभकारी है तुलसी ( khashi ki samasaya ke liye labhkari hai tulsi)|

खांसी की समस्या से राहत पाने के लिए आप तुलसी की पत्तियों से बने शरबत का सेवन कर सकते हैं, इस शरबत का सेवन बच्चों को आधी से डेढ़ चम्मच मात्रा तथा बड़ों को दो से चार चम्मच मात्रा में कराना चाहिए, इसका सेवन करने से खांसी, स्वास, गले में खराश, आदि में लाभ होता है।

शरबत को बनाने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी।

  1. कास-श्वास-तुलसी-पत्र (मंजरी सहित) 50 ग्राम।
  2. अदरक 25 ग्राम।
  3. काली मिर्च 15 ग्राम
  4. 10 ग्राम छोटी इलायची का चूर्ण।
  5. 200 ग्राम चीनी।
  6. शुद्ध जल।


बनाने की विधि
तुलसी की पत्तियों से शरबत बनाने के लिए सर्वप्रथम कास-श्वासतुलसी-पत्र (मंजरी सहित) 50 ग्राम मात्रा में लें तथा इसमें 25 ग्राम अदरक व 15 ग्राम काली मिर्च के साथ 500 मिलीलीटर मिलाकर काढ़ा बना ले, जब यह एक चौथाई बच जाए तो आप इसमें छोटी इलायची का चूर्ण वाह 200 ग्राम चीनी मिलाकर पकाएं, एक तार की चाशनी हो जाने के बाद इसे छानकर रख लें, तथा इसका सेवन करें।

डायरिया तथा पेट की मरोड़ में है लाभकारी ( diarrhea tatha pet ki mard mai hai labhkari)|

तुलसी डायरिया तथा पेट की मरोड़ जैसी समस्याओं में लाभकारी सिद्ध होती है इसके लिए आप तुलसी के 10 पत्तियों को 1 ग्राम जीरा मिलाकर पीस दे, तथा शहद के साथ सेवन करें।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में है सहायक ( rog pratirodhak shamta badhane me hai sahayak )

20 ग्राम तुलसी के बीज के साथ 40 ग्राम मिश्री मिलाकर पीस दें, इस मिश्रण को प्रतिदिन 1 ग्राम मात्रा में सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

चेहरे की चमक बढ़ाने में है सहायक ( chehre ki chamak badane mai hai sahayak )।

तुलसी हमारी त्वचा के अत्यंत लाभदायक है, इसका इस्तेमाल करने से हमारे चेहरे से कील मुंहासे दूर होते हैं।

सांस की दुर्गंध को दूर करती है तुलसी ( saas ki durgandh dur karti hai tulsi )।

यदि आपके मुंह तथा सांस से बदबू आती है तो आप तुलसी के प्रयोग से इस दुर्गंध से छुटकारा पा सकते हैं, इसके लिए जब भी आपके मुंह से दुर्गंध आए तो आपने तुलसी की कुछ पत्तियों को चबा लेना है, ऐसा करने से दुर्गंध दूर हो जाती है।

चोट लगने पर करें तुलसी का प्रयोग ( chot lagne par keare tulsi ka prayog )।

तुलसी में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जिस कारण यह घाव को पकने नहीं देती, इसलिए यदि कभी किसी को चोट लग जाए तो तुलसी की पत्तियों के साथ फिटकरी मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।

प्रतिदिन तुलसी का पानी पीने से होने वाले लाभ।

  • यदि आपको सर्दी, जुखाम अथवा गले में खराश है तुलसी के पानी का सेवन करें क्योंकि सर्दी जुखाम अथवा गले में खराश होने पर तुलसी का पानी पीने से यह सभी समस्याएं दूर होती है।
  • तुलसी का पानी पीने से शुगर कंट्रोल होता है, इसीलिए डायबिटीज के रोगियों को तुलसी के पानी का सेवन करना चाहिए।
  • यदि आपको कब्ज, लूज मोशन तथा पाचन से संबंधित समस्या है तो तुलसी के पानी का सेवन अवश्य करें, क्योंकि तुलसी का पानी इन सभी पेट संबंधी समस्याओं दिलाता है।
  • प्रतिदिन तुलसी का पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं,तथा इसके साथ ही हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

पेट संबंधी समस्या है तो ऐसे करें तुलसी का सेवन।

  • यदि आपको पेट की एसिडिटी से संबंधित समस्या है, तो प्रतिदिन सुबह उठकर दो से तीन तुलसी की पत्तियां चबायें  ऐसा करने से आपको लाभ होगा।
  • यदि आपके पेट में दर्द हो रहा है तो आप नारियल पानी में तुलसी की पत्तियों का रस तथा नींबू मिलाकर सेवन कर सकते हैं, ऐसा करने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
  • चाय अथवा काढ़े  में तुलसी की पत्तियों को मिलाकर अवश्य सेवन करें, क्योंकि ऐसा करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है तथा इसके साथ ही संक्रमण से बचाव होता है।

यदि इस लेख में किसी भी प्रकार की त्रुटि हो तो हमें अवश्य बताएं,धन्यवाद्

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